
लखनऊ (नागेंद्र सिंह चौहान)। लगातार आठ गर्भहानियों के बाद हर उम्मीद खो चुकी ‘सविता देवी’ की गोद आखिरकार भर गई। गोमतीनगर के विराम खंड स्थित मिन्नर्वा सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में हुए सफल ऑपरेशन के बाद उन्होंने एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया है। यह सफलता स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रज्ञा गुप्ता की सतत मॉनिटरिंग और उचित इलाज का परिणाम बताई जा रही है।
कई वर्षों का दर्द—हर बार अधूरी रह जाती थी मातृत्व की खुशी
जानकारी के अनुसार, सविता की पहली और दूसरी गर्भावस्था तीन महीने में ही खत्म हो गई थी। तीसरा बच्चा सातवें महीने में पैदा होते ही चल बसा। इसके बाद चौथी, पाँचवीं, छठी और सातवीं गर्भावस्था में नौवें महीने में ही गर्भ में बच्चे की धड़कन बंद हो जाती थी। परिवार वालों ने बताया कि उन्होंने गाँव व सरकारी अस्पतालों में समय–समय पर इलाज कराया, लेकिन कहीं भी पूरी निगरानी नहीं मिल पाई।
सबसे बड़ा सदमा तब लगा जब आठवीं गर्भावस्था के दौरान ऑपरेशन के समय ही बच्चा खत्म हो गया। इस घटना के बाद परिवार पूरी तरह टूट चुका था।
दो महीने की गर्भ में पहुँची सही इलाज के लिए
लगातार असफलताओं के बाद सविता दो महीने की गर्भावस्था में डॉ. प्रज्ञा के पास आईं। डॉक्टर ने इसे हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी मानते हुए शुरुआत से ही विशेष ध्यान दिया। इस बाबत डॉ. प्रज्ञा ने जानकारी देते हुए बताया-
गर्भ को सुरक्षित रखने के लिए सपोर्टिव इंजेक्शन दिए गए.
नियमित फीटल डॉप्लर से बच्चे की हर गतिविधि पर नज़र रखी गई.
समय पर फेफड़ों की परिपक्वता के लिए इंजेक्शन लगाए गए.
गर्भावस्था के दौरान बढ़े लिवर एंज़ाइम व सूजन का इलाज किया गया.
9वें महीने में सुरक्षित ऑपरेशन, परिवार की आँखों में खुशी के आँसू.
लगातार निगरानी और उपचार से गर्भावस्था सुरक्षित रूप से नौवें महीने तक पहुँची। इसके बाद गोमती नगर के विरामखंड स्थित मिन्नर्वा सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में ऑपरेशन कर एक स्वस्थ बच्ची का जन्म कराया गया। परिवार ने कहा कि आठ बच्चे खोने के बाद हमने उम्मीद छोड़ दी थी, लेकिन डॉक्टर की मेहनत और देखभाल ने हमें नई जिंदगी दी है।
डॉक्टर बोलीं— समय पर मॉनिटरिंग से बचाई जा सकती हैं हाई-रिस्क प्रेग्नेंसियाँ
डॉ. प्रज्ञा का कहना है कि लगातार गर्भहानियाँ होने पर मरीज को नियमित परीक्षण और करीबी निगरानी की आवश्यकता होती है। सही उपचार मिलने पर ऐसे कठिन मामलों में भी स्वस्थ प्रसव संभव है।
