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त्रिलोक कुमार ने स्वर्ण पदक जीत रचा इतिहास,5000 मीटर एथलेटिक्स प्रतियोगिता में रहे अव्वल, जर्मनी के वर्ल्ड यूनिवर्सिटीज गेम्स में भी भारत का किया प्रतिनिधित्व 

दरभंगा। ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर क्रीड़ा परिषद् के स्विफ्ट धावक त्रिलोक कुमार ने रविवार को खेल जगत में इतिहास रच दिया। कुमार ने खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स, 2025 में 5000 मीटर एथलेटिक्स इवेंट में स्वर्ण पदक जीतकर ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, मिथिलांचल की ख्याति राष्ट्रीय पटल पर दर्ज कर दी। ध्यातव्य हो, यह पहला मौका है जब इस विश्वविद्यालय ने खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स में स्वर्ण पदक प्राप्त किया है। ऐतिहासिक उपलब्धि से समूचे ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय परिवार में खुशी और गौरव जताई जा रही है। यूनिवर्सिटी कंटिजेंट मैनेजर मनीष राज ने इस संबंध में बताया खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स 2025 का आयोजन राजस्थान विश्वविद्यालय द्वारा राज्य के सात शहरों (जयपुर,अजमेर, उदयपुर,जोधपुर, बीकानेर,कोटा, भरतपुर) में 24 नवंबर से 5 दिसंबर तक आयोजित हो रहे है। ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय की कुल तीन टीमें क्रमशः जोधपुर में टेबल- टेनिस महिला टीम, बीकानेर में कबड्डी महिला टीम तथा जयपुर में एथलेटिक्स पुरुष टीम अपने-अपने मुकाबलों में सक्रिय रूप से भाग ले रही हैं। स्वर्ण पदक अपने नाम करने वाले धावक त्रिलोक कुमार इससे पूर्व जर्मनी में आयोजित वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। निसंदेह उनका अनुभव भी इस प्रतियोगिता में पदक जीतने हेतु सहायक सिद्ध हुआ। इस ऐतिहासिक जीत पर कुलपति, प्रो. संजय कुमार चौधरी ने अपनी ओर से प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा त्रिलोक कुमार की उपलब्धि पूरे विश्वविद्यालय के लिए गर्व की बात है। कुलपति ने कुमार को टेलीफोनिक बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए अन्य खिलाड़ियों को बेहतर प्रदर्शन करने का आशीर्वचन प्रेषित किया। उन्होंने स्वर्ण पदक को खेल जगत के प्रति विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता का परिणाम माना।

इस मांगलिक अवसर पर विश्वविद्यालय अधिकारियों ने भी त्रिलोक कुमार को शुभकामनाएं प्रेषित करते हुए जीत की श्रृंखला को लगातार जारी रखते हुए सामूहिक समर्पण,अनुशासन,मेहनत से आगे बढ़ने की सलाह दी। विश्वविद्यालय खेल पदाधिकारी अमृत कुमार झा ने प्रसन्नता व्यक्त करते त्रिलोक कुमार की कड़ी मेहनत,अनुशासन,मानसिक मजबूती को इस महत्त्वपूर्ण उपलब्धि का कारक बताया। त्रिलोक की उपलब्धि विश्वविद्यालय के खेल इतिहास में स्वर्णिम अध्याय के रूप में सदैव याद किया जाएगा। श्री झा ने इस उपलब्धि से जुड़े सभी खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों,अधिकारियों और सहयोगियों को दिल से साधुवाद दिया।

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