
दरभंगा। एनडीए से भाजपा के नगर विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवार संजय सरावगी ने कहा के आर.के.मिश्रा आज भी दिखाना चाह रहे है अपनी पुरानी वर्दी का रौब अधिकारियों के मान सम्मान के साथ कर रहे हैं खिलवाड़ श्री मिश्रा ने समाज को जातिगत आधार पर बाँटने का भरपूर प्रयास किया। लेकिन दरभंगा की प्रबुद्ध जनता ने इसे अस्वीकार किया। बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री,दरभंगा विधानसभा से एनडीए प्रत्याशी संजय सरावगी ने मंगलवार को जनसुराज के प्रत्याशी आर.के मिश्रा के धरना पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा चुनाव परिणाम से पूर्व ही श्री मिश्रा अपनी जमानत जब्त होने के भय से घबराए हुए हैं, इसी कारण वे अनर्गल बयानबाज़ी, अनुचित प्रलाप कर रहे हैं। श्री सरावगी ने कहा दरभंगा की धरती सदैव शांति, सौहार्द और सद्भाव की प्रतीक रही है। श्री मिश्रा पूर्व में आईपीएस अधिकारी रह चुके हैं, इसलिए आज भी वे अपनी वर्दी के पुराने रौब का प्रभाव दिखाने का प्रयास कर रहे हैं। अमर्यादित रूप से जिला के अधिकारियों के मान सम्मान के साथ वे खिलवाड़ कर रहे हैं, जो अति निंदनीय है लेकिन दरभंगा की जागरूक जनता उन्हें पहले ही खारिज कर चुकी है। श्री सरावगी ने कहा बिहार में अब कानून का राज स्थापित है, इसलिए किसी व्यक्ति का रौब , भय या दबाव की राजनीति को जनता स्वीकार नहीं करेगी। उन्होंने कहा श्री मिश्रा को यह समझना चाहिए कि अब वे पुलिस पदाधिकारी नहीं,बल्कि एक राजनीतिक दल के प्रतिनिधि हैं। उन्हें दरभंगा की जनता की बातों और भावनाओं को समझना चाहिए। श्री सरावगी ने कहा कि एनडीए के सभी कार्यकर्ता पूरे अनुशासित रहते हुए चुनाव को संपन्न कराने में अपनी भूमिका अदा की है, जिसकी जितनी सराहना की जाए वह कम है। साथ साथ दरभंगा के जागरूक मतदाताओं ने भी अपने संवैधानिक कर्तव्यों की रक्षा पूरे तत्परता से की है। उन्होंने कहा ये लोग चुनावी मौसम के नेता हैं। इन्हें न तो जनता की समस्याओं से कोई मतलब है और न ही दरभंगा के विकास से कोई सरोकार। 14 नवम्बर को चुनाव परिणाम आने के बादश्री मिश्रा कहीं दिखाई भी नहीं देंगे और अपने पुराने ठिकाने पर लौट जाएंगे। उन्होंने बताया चुनाव के दौरान भी श्री मिश्रा ने समाज को जातिगत आधार पर बाँटने का भरपूर प्रयास किया, लेकिन दरभंगा की प्रबुद्ध जनता ने उनके इस प्रयास को पूरी तरह अस्वीकार कर दिया। उन्होंने जनता को शांतिपूर्ण एवं निष्पक्ष मतदान के लिए धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा लोकतंत्र में जनता का निर्णय सर्वोच्च होता है, जिसे हर राजनैतिक दल और प्रत्याशी को सम्मानपूर्वक स्वीकार करना चाहिए।