अंतरराष्ट्रीय

अफगानिस्तान : संगीत सुनने पर 13 लोगों को गोलियों से भूना

डेस्क : तालिबान (Taliaban) ने कहा है कि पूर्वी अफगानिस्तान (Afghanistan) में एक शादी समारोह के दौरान संगीत बजाने पर 13 लोगों की हत्या करने वाले तीन हमलावरों में से दो को गिरफ्तार कर लिया गया है. नंगरहार प्रांत (Nangarhar province) के शम्सपुर मार घुंडी गांव में शुक्रवार रात को खुद को तालिबानी लड़ाका बताने वाले बंदूकधारियों ने शादी समारोह पर हमला किया. अफगानिस्तान पर कब्जे के बाद से ही तालिबान ने सख्त इस्लामिक कानूनों को लागू करना शुरू कर दिया है. शहरी इलाकों में इसका असर कम देखने को मिल रहा है, मगर ग्रामीण इलाकों पर कानूनों को सख्ती से लागू किया जा रहा है.

समाचार एजेंसी एएफपी के मुताबिक, तालिबान सरकार के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने कहा, ‘तालिबान ने घटना के सिलसिले में दो संदिग्धों को हिरासत में ले लिया है. एक आरोपी अभी भी फरार है, जिसकी अभी भी तलाश की जा रही है. पकड़े गए घटना के अपराधियों को शरिया कानून के तहत सजा का सामना करने के लिए सौंप दिया गया है. इन आरोपियों ने अपने निजी झगड़े को अंजाम देने के लिए इस्लामिक अमीरात के नाम का इस्तेमाल किया है.’ एएफपी के मुताबिक, पीड़ित के एक रिश्तेदार ने कहा कि तालिबानी लड़ाकों ने सरेआम लोगों पर गोलियां बरसा दीं.

संगीत सुनने वाले लोगों को मनाने का अधिकार: मुजाहिद

मुजाहिद ने कहा, ‘इस्लामिक अमीरात के रैंकों में किसी को भी किसी को संगीत या किसी भी चीज से दूर करने का अधिकार नहीं है. लोग केवल संगीत सुनने वालों को मनाने की कोशिश कर सकते हैं. यही मुख्य तरीका है.’ उन्होंने कहा, ‘अगर कोई किसी को खुद से मारता है. भले ही वे हमारे लड़ाके हों, यह एक अपराध है और हम उन्हें अदालतों में पेश करेंगे और वे कानून का सामना करेंगे.’ देश पर कब्जे के बाद से तालिबानी लड़ाकों को देश के प्रमुख शहरों में हथियारों के साथ देखा जा सकता है. ये लोग कई बार इस्लामिक कानूनों को लागू करने का काम भी करते हैं.

अभी तक संगीत बैन को लेकर आदेश जारी नहीं किया गया

अफगानिस्तान पर जब तालिबान ने 1996 से 2001 तक शासन चलाया तो, उन्होंने संगीत पर प्रतिबंध लगाया हुआ था. हालांकि, नई सरकार ने अभी तक इस तरह का कोई आदेश जारी नहीं किया है. लेकिन तालिबान का नेतृत्व मनोरंजन के लिए इसके इस्तेमाल से नाराज है और इसे इस्लामी कानून के उल्लंघन के रूप में देखता है. पिछली तालिबान सरकार ने इस्लामी कानून की बहुत सख्त व्याख्या की और दोषियों को कठोर सजा दी. हालांकि, अमेरिका समर्थित सरकार को उखाड़ फेंकने के बाद अगस्त में अफगानिस्तान पर फिर से कब्जा करने के बाद से तालिबान ने अधिक उदार चेहरा दिखाने की कोशिश की है.

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