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जयंती विशेष (भगत सिंह) : जानिए भगत सिंह के बारे में क्या सोचते थे गांधी

 डेस्क : देश की आजादी के लिए क्रांतिकारी भगत सिंह हंसते-हंसते फांसी के फंदे से झूल गए थे. भगत सिंह आजादी की जंग में अन्य नेताओं से हटकर काम करते थे और उनका आजादी पाने का नजरिया कुछ और था. भगत सिंह के आक्रामक व्यवहार को कई लोग पसंद भी नहीं करते थे. इसी वजह से कहा जाता है महात्मा गांधी, भगत सिंह के तरीके को पसंद नहीं करते थे. आज उनकी जन्मतिथि पर जानने की कोशिश करते हैं कि आखिर महात्मा गांधी भगत सिंह के बारे में क्या सोचते थे.

राष्ट्रीय अभिलेखागार की ओर से प्रकाशित ‘अभ्युदय के भगत सिंह विशेषांक व अन्य अंकों पर आधारित’ किताब में महात्मा गांधी का भी एक लेख हैं, जो उन्होंने भगत सिंह के लिए लिखा था. ये लेटर महात्मा गांधी ने भगत सिंह के शहीद होने के बाद लिखा था. ऐसे में जानते हैं कि उन्होंने अपने लेख में क्या लिखा था.

महात्मा गांधी ने भगत सिंह के लिए लिखा

”यद्यपि मैंने उसे लाहौर में कई बार विद्यार्थी रूप में देखा होगा, मुझे अब उसकी शक्ल याद नहीं. परंतु यह मेरा सौभाग्य था कि मैंने पिछले महीनों में भगतसिंह की देशभक्ति, उसके साहस और भारतीय मानव समाज के लिए उसके प्रेम की कहानियां सुनी थीं. मैंने उसके संबंध में जो कुछ सुना था, मैं समझता हूं उसका साहस अतुलनीय था. उनके गुणों के कारण हम इस बात को भूल जाते हैं कि उन्होंने अपने साहस का दुरुपयोग किया. ऐसे युवक और उसके साथियों की फांसी ने उनके सिर पर शहादत का ताज रख दिया है.

हजारों लोग आज उनकी मृत्यु को अपने सगे संबंधी की मौत के समान महसूस करते हैं. जहां तक याद आता है किसी की जिंदगी के संबंध में आज तक इतना अधिक भावावेश प्रकट नहीं किया गया, जितना सरदार भगतसिंह के लिए प्रकट किया गया था. इसलिए जहां मैं उन नवयुवक देशभक्तों की स्मृति में जो कुछ भी प्रशंसा के भाव कहे जा सकते हैं, उनके साथ अपने आप को सम्मिलित करता हूं, मैं देश के नौजवानों को उनके उदाहरण करने के विरुद्ध सावधान करना चाहता हूं.

हर सूरत में उनकी कुर्बानी, उनके श्रम और उनके असीम साहस का अनुकरण करना चाहिए, परंतु उनके इन गुणों को उस प्रकार से इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, जिस प्रकार उन्होंने किया था. हमारे देश का उद्दार हत्या के जरिए नहीं होना चाहिए. सरकार के बारे में मैं यह अनुभव करता हूं कि उसने एक स्वर्णिम अवसर को दिया है. इस अवसर पर वह क्रांतिकारियों के हृदयों को जीत सकती थी. अपनी पाशविक शक्ति का प्रदर्शन करने में जो उतावलापन सरकार ने दिखाया है वह साबित करता है कि बड़ी बड़ी ऊंची और शानदार घोषणाओं के बावजूद ये इस शक्ति को छोड़ना नहीं चाहते.

मेरी यह राय है कि सरकार ने जो भारी गलती की है, उससे हमारी स्वतंत्रता को जीतने के लिए भगत सिंह और उसके साथ मरे हैं. हमें यह मौका आवेश में कोई काम करके खो न बैठना चाहिए.”

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