डेस्क :पहाड़ों की रानी एक बार फिर भारी बारिश से तबाह हो गई है, जिसमें कई लोगों की जान चली गई और भारी तबाही मची। 3 अक्टूबर की रात से शुरू हुई बारिश की जानकारी भारतीय मौसम विभाग द्वारा मात्र 12 घंटे पहले जारी की गई। छह घंटे की इस मूसलाधार बारिश ने बालासन नदी पर बना दुधिया पुल, जो सिलीगुड़ी को पर्यटन नगरी मिरिक से जोड़ता है, नष्ट कर दिया और सभी राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों को बाधित कर दिया। अपनी सुंदरता और स्वास्थ्यवर्धक जलवायु के लिए प्रसिद्ध दार्जिलिंग अतीत में कई प्राकृतिक आपदाओं का शिकार रहा है। उपलब्ध रिकॉर्ड बताते हैं कि 1899, 1934, 1950, 1968, 1975, 1980, 1991 और हाल ही में 2011 और 2015 में बड़े पैमाने पर भूस्खलन हुए। वर्ष 1968 में अक्टूबर में ही विनाशकारी बाढ़ आई थी, जिसमें एक हज़ार से ज़्यादा लोग मारे गए थे।
