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शाकाहारी भोजन और जीवनशैली जरूरी : कुलपति

आहार आदतों पर ध्यान देना आवश्यक : दुबे

संस्कृत विश्वविद्यालय में वेबिनार आयोजित

 

दरभंगा : कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के राष्ट्रीय सेवा योजना एवं वेगन आउट रीच संस्था के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार को भोजन,ग्रह और स्वास्थ्य (फूड, प्लानेट एन्ड हेल्थ ) विषय पर एक वेबिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. लक्ष्मीनिवास पाण्डेय ने पंचकोश की अवधारणा अन्नमय कोश से लेकर आनंदमय कोश तक का उल्लेख किया।उन्होंने बताया कि अन्न के माध्यम से हम आनंद की प्राप्ति कर सकते हैं। हम जैसा खाना खाएंगे , हमारी प्रवृति वैसी ही बनेगी। उन्होंने शाकाहारी व ताजा भोजन को स्वास्थ्य के लिए सर्वोत्तम बताया । साथ ही , उन्होंने अहिंसा परमो धर्मः के आदर्श को भी विस्तार से समझाया। उक्त जानकारी देते हुए विश्वविद्यालय के पीआरओ निशिकांत ने बताया कि सभी वक्ताओं ने शाकाहारी भोजन व नियमित जीवन शैली अपनाने पर बल दिया।
मुख्य वक्ता आउटरीच के समन्वयक अभिषेक दुबे ने वाइल्डलाइफ़ और मानव जीवन के ऐतिहासिक संतुलन तथा आज की असंतुलित स्थिति को आँकड़ों और प्रेज़ेंटेशन के माध्यम से स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि पहले जहाँ 99.9 फीसदी वाइल्डलाइफ़ और 0.1 फीसदी मानव जीवन था। व आज 63 फीसदी लाइवस्टॉक यानी पशुधन, 35 प्रतिशत मानव जीवन और महज 2 प्रतिशत वाइल्डलाइफ़ शेष रह गई है।
उन्होंने फैक्ट्री फार्मिंग की वास्तविकताओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इसमें जल की अत्यधिक खपत होती है। पशुओं को जबरन गर्भधारण कराया जाता है, एंटीबायोटिक का उपयोग होता है और मछलियाँ भी प्रदूषित जल व प्लास्टिक के कारण अस्वस्थ होती हैं। दूध, अंडा, माँस और मछली जैसे आहार के पीछे छिपे शोषण को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि जिसे हम सेवा मानते हैं, वह वास्तव में शोषण बन जाता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि किस प्रकार बछड़ों को दूध से वंचित किया जाता है, बूढ़ी गायों को कसाइयों के हाथ बेच दिया जाता है और मुर्गियों को अंडा उत्पादन के लिए मजबूर किया जाता है। मछलियों को पकड़ने की प्रक्रिया भी अमानवीय है। उन्होंने कहा कि इन कारणों से हमें अपनी जीवनशैली और आहार आदतों की अवश्य समीक्षा करनी होगी और वेगन यानी शाकाहारी जीवनशैली अपनानी होगी। उन्होंने यह भी बताया कि न्यायमूर्ति डी.वाई. चंद्रचूड़, अभिनेता जोआक्विन फ़ीनिक्स, रिचा चड्ढा, पर्वतारोही कुंतल , आचार्य प्रशांत और मल्लिका शेरावत जैसे अनेक चर्चित लोग पहले ही इस जीवनशैली को अपना चुके हैं।
अध्यक्ष छात्र कल्याण तथा वेबिनार के आयोजन सचिव प्रो. पुरेन्द्र बारिक ने संस्कृत में ही विषय प्रवर्तन किया और कहा कि शुद्ध शाकाहारी जीवनशैली की ओर बढ़ना मानवता और धर्म दोनों के लिए आवश्यक है। उन्होंने जीवों के बध के साथ-साथ जीव उत्पादों के परित्याग पर भी बल दिया।
कार्यक्रम में स्वागत भाषण राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम समन्वयक तथा वेबिनार के संयोजक डॉ. सुधीर कुमार झा ने प्रस्तुत किया। उन्होंने इस विषय को समय की आवश्यकता बताते हुए कहा कि युवाओं को आहार और पर्यावरण के संबंध को समझकर जागरूक समाज निर्माण में योगदान देना चाहिए।
कार्यक्रम का संचालन सह संयोजिका व स्नातकोत्तर इकाई की कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. साधना शर्मा द्वारा किया गया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. विभव झा ने प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में राष्ट्रीय सेवा योजना की 25 इकाइयों से 405 प्रतिभागी ऑनलाईन पंजीकृत होते हुए कार्यक्रम-पदाधिकारी सहित 166 स्वयंसेवकों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।

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