डेस्क :भारत में चुनाव सिर्फ़ राजनीतिक रैलियों, घोषणापत्रों और सोशल मीडिया पर चर्चाओं में ही नहीं जीते या हारे जाते। घरों, रसोई और दफ़्तरों में, एक खामोश मतदाता वर्ग मतदान के दिन से पहले अपनी पसंद और प्राथमिकताओं पर चर्चा करता है। यह वर्ग कोई और नहीं, बल्कि महिला वर्ग है। इस साल बिहार में चुनाव होने है। ऐसे में महिला मतदाता वहां हमेशा की तरह इस बार भी अहम भूमिका निभाने वाली हैं। चुनाव दर चुनाव, महिला मतदाता राजनीतिक दिग्गजों की जीत और हार में एक अहम कारक बनकर उभरी हैं। और यह बात बिहार में सबसे ज़्यादा सच है, जहाँ मौजूदा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के शराबबंदी के कदम ने उन्हें महिला मतदाताओं का समर्थन दिलाया और सत्ता में उनकी लंबी दौड़ सुनिश्चित की
