विश्व की धरोहर है संस्कृत : संगठन मंत्री
संस्कृत सम्भाषण प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन
दरभंगा : कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के बहुउद्देशीय भवन में शिक्षाशास्त्र विभाग द्वारा दस दिवसीय संस्कृत सम्भाषण प्रशिक्षण वर्ग के समापन कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मंगलवार को कुलपति प्रो.लक्ष्मीनिवास पाण्डेय ने कहा कि
संस्कृत शास्त्रों में दक्षता लाने के लिए तथा उसकी गूढ़ बातों को जानने के लिए संस्कृत में सम्भाषण बेहद जरूरी है। संस्कृत सम्भाषण से उच्चारण की स्पष्टता होती है, वाणी की मधुरता बढ़ती है और विचारों में भी शुद्धता आती है। स्वाभाविक है कि ऐसे में यह व्यक्तित्व को निखारने में सहायक होता है। सम्भाषण प्रशिक्षण के उद्देश्यों को स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि भाषा सीखने का सरल मार्ग है संस्कृत सम्भाषण । इसके निरन्तर अभ्यास से भाषा का प्रवाह तेज होता है। उक्त जानकारी देते हुए पीआरओ निशिकांत ने बताया कि इस मौके पर मुख्यातिथि संस्कृत भारती बिहार प्रांत के संगठन मंत्री श्रवण कुमार ने भी सम्भाषण की महत्ता को गहराई से रेखांकित किया। कहा कि संस्कृत भाषा केवल भारत की प्राचीन भाषा ही नहीं, अपितु सम्पूर्ण विश्व की वैज्ञानिक, दार्शनिक एवं सांस्कृतिक धरोहर है। संस्कृत सम्भाषण अर्थात् संस्कृत में प्रतिदिन की वार्ता करने की परम्परा, इस भाषा को पुनर्जीवित करने तथा जनसामान्य तक पहुँचाने का प्रभावी साधन है। हमें इनका निरन्तर अभ्यास करते रहना चाहिए। वहीं,शिक्षाशास्त्र विभाग के निदेशक डॉ.घनश्याम मिश्र ने सम्भाषण को प्रशिक्षण का एक प्रमुख अंग बताया।कार्यक्रम का संचालन करते हुए डॉ.रामसेवक झा ने कहा कि संस्कृत भाषा की प्रत्येक ध्वनि में आध्यात्मिक स्पन्दन है। सम्भाषण से व्यक्ति का मन, बुद्धि एवं हृदय पवित्र और उन्नत होता है।
सम्पूर्ति कार्यक्रम में ध्येय मंत्र अंशु कुमारी, शिविर गीत आदित्य कुमार एवं सुधार कुमार तथा संस्कृत में परिचय अंकिता कुमारी ने किया ।अनुभव कथन रजनीश झा, जुली कुमारी संख्या कथन सुजीत कुमार,सुनीता कुमारी तथा दिनचर्या सुधीर एवं जूली कुमारी ने प्रस्तुत किया।प्रशिक्षण वर्ग का अनुभव अमित कुमार झा ने प्रस्तुत किया।
स्वागत भाषण डॉ.निशा तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ.रामसेवक झा ने किया।
कार्यक्रम में डॉ.अवन कुमार राय, डॉ.प्रीति रानी, कुन्दन कुमार, गोपाल कुमार महतो, राकेश कुमार, अरुण शर्मा सहित दर्जनों छात्र -छात्राएं उपस्थित थे।
