डेस्क :इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अपने एक निर्णय में कहा है कि यह स्थापित कानून है कि विवाह प्रमाण पत्र, उस विवाह को साबित करने का एक साक्ष्य है लेकिन इस प्रमाण पत्र की अनुपलब्धता विवाह को अवैध नहीं बनाती है। इस टिप्पणी के साथ उच्च न्यायालय ने आजमगढ़ की परिवार अदालत के निर्णय को रद्द कर दिया निचली अदालत ने विवाह पंजीकरण प्रमाण पत्र पेश करने से छूट देने का याचिकाकर्ता का आवेदन खारिज कर दिया था। सुनील दूबे नामक एक व्यक्ति की रिट याचिका स्वीकार करते हुए न्यायमूर्ति मनीष निगम ने कहा कि जब हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 के प्रावधानों के अनुसार हिंदू विवाह संपन्न होता है, तब इस अधिनियम की धारा आठ(एक) के तहत विवाह के साक्ष्य के लिए राज्य सरकार को विवाह पंजीकरण के नियम बनाने का अधिकार है
