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संस्कृत के संवर्धन के लिए प्रयास जारी रहे : कुलपति

दरभंगा। केएसडीएसयू के कुलपति प्रो.लक्ष्मीनिवास पाण्डेय ने आज कहा कि संस्कृत है तो संस्कृति है। इसके विकास व संवर्धन के हर सम्भव प्रयास जारी रहना चाहिए। बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड, पटना द्वारा रविन्द्र भवन में संस्कृत दिवस समारोह के अवसर पर आयोजित कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए मंगलवार को उन्होंने उक्त बातें कही। कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री, मंत्री व बिहार सरकार के उच्च पदस्थ पदाधिकारियों की मौजूदगी में उन्होंने वर्तमान परिप्रेक्ष्य में संस्कृत भाषा की उपयोगिता पर बल दिया। उन्होंने विद्यालयों में संस्कृतमय वातावरण निर्माण करने तथा छात्रों के बीच भाषा प्रवाहित के लिए दस दिवसीय संस्कृत सम्भाषण आयोजित करने का भी सुझाव दिया। कुलपति ने इसके अलावा और कई सुझाव दिए जिससे संस्कृत का विकास आसान होगा। उन्होंने यह भी कहा कि जाने अनजाने में हमलोग देवभाषा कहकर संस्कृत से विमुख होते चले गए। अब भी समय है इस सोच में बदलाव लाया जाये। अन्यथा और विकट स्थिति हो जाएगी। इसे व्यवहार में लाने का प्रयास करना होगा। उक्त जानकारी देते हुए पीआरओ निशिकांत ने बताया कि संस्कृत जगत से जुड़ी कई समस्याओं को भी कुलपति ने शिक्षा विभाग के अपर सचिव के समक्ष रखा और समाधान का भी अनुरोध किया। बता दें कि संस्कृत शिक्षा बोर्ड ने नए पाठ्यक्रम को आज हरि झंडी दे दी है। कार्यक्रम के दौरान ही इसे विमोचित किया गया। संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व कुलानुशासक व धर्मशास्त्र विभाग के अध्यक्ष प्रो0 श्रीपति त्रिपाठी एवं सहायक प्राध्यापक डॉ रामसेवक झा भी नए पाठ्यक्रम निर्माण समिति के सदस्य के रूप में कार्यक्रम में उपस्थित थे। इन दोनों सदस्यों को वहां सम्मानित भी किया गया।

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