साहित्य

हास्य-व्यंग्य : चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे से (नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान)

चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे से

 

नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान

(वरिष्ठ पत्रकार-साहित्यकार यूपी)

 

ज मैं प्रपंच चबूतरे पर थोड़ा देर से पहुंचा। क्योंकि, कोरोना के बढ़ते संक्रमण के चलते मेरे घर के आसपास साफ-सफाई और छिड़काव चल रहा था। मैं जब चबूतरे पर पहुंचा, तब चतुरी चाचा के साथ ककुवा, कासिम चचा, मुंशीजी व बड़के दद्दा विराजमान थे। सब जने कोरोना की विस्फोटक स्थिति पर बात कर थे। मेरे पहुंचते ही चतुरी चाचा बोले- लॉकडाउन को चरणबद्ध ढंग से खोलना सरकार की मजबूरी है। अगर देश महीनों लॉकडाउन रहेगा तो भारत आर्थिक मोर्चे पर 10-20 साल पीछे चला जाएगा। लेकिन, जनता की क्या मजबूरी है, जो अपने को मौत के मुंह में खुद धकेल रही है। आखिर लोगों को मॉस्क लगाने और दो गज की दूरी रखने में क्या दिक्कत है?

ककुवा कहने लगे- चतुरी भाई, हमरे देस केरी जनता नियम-कानून न मानय का ही आजादी समझत हय। हम काल्हि भिंडी बेचय सब्जी मंडी गए रहन। हुवाँ द्यखा कि तमाम आढ़तिया, व्यापारी अउ किसान तर-उपर रहयं। सैकड़न केरी भीर रहय। उहिमा आधे मॉस्क नाय लगाय रहयं। हम तौ जल्दी तेने अपनी भिंडी तुरपा अउ निकर लेहन। सड़क पर आयन तौ हुंवव वहय दसा रहय। टेम्पो स्टैंड पय चारि पुलिस वाले बैठे रहयं। चारिव बिन मॉस्क मुंह मा मुँह जोरि कय गप्पें हाँकत रहयं। यह दसा हय नखलउ केरी।
इसी दरम्यान चंदू बिटिया गाय का मीठा खीझरा, गिलोय का काढ़ा व गुनगुना नींबू पानी लेकर आ गई। हम सबने गुड़ में पगा गाय का स्वादिष्ट खिझरा खाकर नींबू पानी पीया। फिर गिलोय काढ़े के साथ बतकही आगे बढ़ी। कासिम चचा ने पूछा- चतुरी भाई, आपकी गाय कब बियाई है? चतुरी चाचा बोले- मेरी श्यामा गाय ने परसों रात में बछड़ा दिया था। बड़के दद्दा बोले- मुझे आठ महीने बाद खीझरा खाने को मिला है। इसके पहले ककुवा की भैंस का खीझरा खाया था।

मुंशीजी ने बतकही को आगे बढ़ाते हुए कहा- ककुवा, हर शहर-कस्बे में यही मंजर दिखता है। लोगों की लापरवाही भारी पड़ती जा रही है। लखनऊ की स्थिति सबसे खराब है। लगभग एक हजार नए कोरोना मरीज रोज निकल रहे हैं। सारे अस्पताल मरीजों से भरे हैं। केवल राजधानी में ही रोज 8-10 लोग कोरोना से मर रहे हैं। इसके बावजूद तमाम लोग मॉस्क नहीं लगा रहे हैं। अब लोग दो गज दूरी का कतई पालन ही नहीं कर रहे हैं। एक तरफ जनता घोर लापरवाही कर रही है। दूसरी तरफ प्रशासन हाथ पर हाथ रखे बैठा है।
चतुरी चाचा बोले- जब कोरोना का संक्रमण फैला नहीं था, तब प्रशासन बड़ा मुस्तैद था। लोगों को मॉस्क लगवाया जा रहा था। बाजार-हाट हर जगह दो गज की दूरी का पालन करवाया जा रहा था। प्रशासन की सुस्ती और जनता की मस्ती के कारण कोरोना वायरस शहर से गांव तक फैल रहा है। ककुवा ने चतुरी चाचा की बात पर मोहर लगाते हुए कहा- यही कारन ते अपनी जंवार मा कोरोना पांव पसार रहा। लोग कहत हयँ कि जिहके कोरोना होय का होई, उहिके होई जाई। जिहके न होय का होई, वहिके कोरोना न होई। यहै सोच सबका लय डूबी।
हम सबने भी चतुरी चाचा, मुंशीजी व ककुवा के विचारों में सहमति जताई। हमने सबको बताया- भारत ने ब्राजील को भी पीछे छोड़ दिया है। लोग यूँ लापरवाह बने रहे तो आने वाले दिनों में भारत दुनिया का सर्वाधिक संक्रमित देश होगा। यहाँ रोज प्रत्येक देश से ज्यादा मरीज निकल रहे हैं। अबतक 41 लाख से ज्यादा लोग कोरोना से पीड़ित हो चुके हैं। इधर तो स्थिति बड़ी भयावह हो गयी है। तकरीबन 80 हजार नए मरीज रोज सामने आ रहे हैं। दुनिया भर में पौने तीन करोड़ लोग कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं। अभी तक इसका टीका नहीं बन सका है। भारत सहित कई देश कोरोना वैक्सीन पर रिसर्च कर रहे हैं। बस, गनीमत यह है कि भारत में कोरोना से मौतें कम हो रही हैं। एक आंकड़े के मुताबिक 70 प्रतिशत से ज्यादा लोग ठीक हो गए हैं। कोविड-19 के नियमों के पालन से ही हम सब कोरोना महामारी से सुरक्षित रहेंगे।

बड़के दद्दा ने विषयांतर करते हुए कहा- बॉलीवुड हीरो सुशांत सिंह राजपूत की मौत के आगे कोरोना महब्याधि और बाढ़ विभीषिका की खबरें दब गईं। टीवी चैनल्स रात-दिन सुशांत-रिया दिखा रहे हैं। अभी तक सीबीआई यह पता नहीं लगा सकी है कि सुशांत की मौत कैसे हुई? वहीं, ईडी भी सुशान्त के 15 करोड़ रुपए की हेराफेरी की जाँच ही कर रही है। हालांकि, एनसीबी वाले बड़े तेज निकले। एनसीबी सुशांत को ड्रग्स दिए जाने की जांच युद्ध स्तर पर कर रहा है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने रिया के भाई शोविक सहित कई लोगों को ड्रग्स के मामले में गिरफ्तार भी कर लिया है। इस मामले में राजनीति चरम पर है। उधर, इसी मामले में बॉलीवुड ऐक्ट्रेस कंगना राणावत कूद पड़ी हैं। शिवसेना और कंगना के मध्य भीषण तकरार चल रही है।

कासिम चचा बोले- कोरोना महामारी के चलते बच्चों की पढ़ाई का बाद नुकसान हो रहा है। मुझे शिक्षण कार्य करते 25 साल हो गए। कल पहला मौका था कि मैं शिक्षक दिवस पर अपने विद्यार्थियों से नहीं मिल पाया। कुछ बच्चों ने फोन पर बधाई जरूर दी थी। इस पर चतुरी चाचा बोले- कासिम मास्टर, चिंता न करो। स्कूल-कॉलेज भी जल्दी खुलेंगे। सरकार ने धीरे-धीरे बहुत कुछ खोल दिया है। हम सबकी तरफ से शिक्षक दिवस की बधाई और गिफ्ट लो। चतुरी चाचा ने कासिम चचा को एक डायरी व दो पेन भेंट किए। वहीं, ककुवा ने 500 की नोट देते हुए कहा- मास्टर, ई लेव मिठाई कय रुपया। आजु पूरे घर का मुंह मीठा कराव।
इसी के साथ आज की बतकही सम्पन्न हो गई। मैं अगले रविवार को चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे पर होने वाली पँचायत को लेकर फिर हाजिर रहूँगा। तबतक के लिए पँचव राम-राम!

 

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