आलेख

कविता : हमारा हौसला हमारी पहचान(निलेश कुमार)

” नकामयाबिया “

कामयाब वो नहीं जिसने  कभी  ना देखि हो नकामयाबिया ,

कामयाब  वह है  जिसने  हरा  दि हो  नकामयाबिया !!

ज़िन्दगी के सफ़र  पर  बहुत   कुछ  सिखा जाती ये नकामयाबिया ,

दर  दर की ठोकरे खिलाती  ये   नकामयाबिया!!

लोगो  के नजर  में  बेचारा बनती  जाती नकामयाबिया,

अपनों से दूर कर देती  ये नकामयाबिया !!

अपनों  के नजर में खुद  को गिरादेती  ये  नकामयाबिया,

अपनी पहचान भुला दे जाती नकामयाबिया!!

सड़को पर  वीरान चलती ये नकामयाबिया,

रिश्तो  में  दरार  लाती ये  नकामयाबिया!!

एक  इंसान को  राह  भटका  जाती नकामयाबिया,

घरो का ताला  तोर चोर  बना देती  नकामयाबिया!!

लोगो का पैसा  चुरा  बईमान बनादेती  नकामयाबिया,

हथियार  उठवा देती ये नकामयाबिया!!

आतंकवाद  बना देती ये नकामयाबिया,

लोगो की जान निकलवा देती  ये नकामयाबिया!!

इन्सान  को  हैवान  बना जाती ये नकामायाबिया ,

नदियों  में डूबा देती नकामयाबिया!!

पंखो में  झुला ले जाती  नकामयाबिया,

इमारत से  कूदा  देती  नकामयाबिया!!

पटरियों पर सुलादेती ये नकामयाबिया,

बदन में  आग लगा देती  नकामयाबिया!!

आत्ताम्हत्या करा देती नकामयाबिया,

इन सबो से  दूर  कुछ कर गुजरने का  प्रेरणा देती  नकामयाबिया!!

पहाड़ो  का सीना चिर उसमे रास्ता बनती  नकामयाबिया,

समुंदर में  उफ्फान  लाती  नकामयाबिया!!

नदियों का रुख   मोड़  देती नकामयाबिया,

रेगिस्तान में  सड़क बना जाती  नकामयाबिया!!

आज से  अच्छा  कल की  उम्मीद  जगाती  नकामयाबिया,

असमान में अपना झंडागाढ जाती  ये नकामायाबिया !!

खुदी को  बुलन्द कर जाती  ये नकामायाबिया ,

इक  नयी  राह  दिखा देती ये नकामायाबिया !! 

कल  से कुछ सिखा  जाती ये नकामायाबिया ,

आज में जिला जाती ये नकामायाबिया !!

भविष्य का  दर्पण  पुरे  समर्पण  के साथ दिखा जाती नकामायाबिया ,

हारे  हुए  को  आज नहीं तो  कल  जित  दिला देती  ये नकामयिनिया……

                                                                           धन्यवाद                                                                               

 

 

                                                                               

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *