प्रादेशिक बिहार मुजफ्फरपुर स्थानीय स्वास्थ्य

स्वास्थ्य, चिकित्सा, शिक्षा एवं परिवार कल्याण सरकार की प्राथमिकता श्रेणी में नहीं हैं शामिल : डॉ. सुरेन्द्र कुमार

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के पूर्व निदेशक सह एसकेएमसीएच के पूर्व अस्पताल अधीक्षक डॉ. सुरेंद्र कुमार ने कोरोना के दौर में बिहार में स्वास्थ्य की लचर व्यवस्था को लेकर जाहिर की गंभीर चिंता

मुजफ्फरपुर : स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के पूर्व निदेशक सह एसकेएमसीएच के पूर्व अस्पताल अधीक्षक डॉ. सुरेंद्र कुमार ने वैश्विक कोरोना महामारी के दौर में बिहार में स्वास्थ्य, शिक्षा की लचर व्यवस्था को लेकर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि बिहार में शिक्षा, स्वास्थ्य व परिवार कल्याण का क्षेत्र दशकों से अव्यवस्थित एवं उपेक्षित रहा है।

डॉ. सुरेंद्र कुमार ने कहा है कि बिहार में जिला अस्पताल, प्राइमरी हेल्थ सेंटर, सब-सेंटर पर या तो संसाधन उपलब्ध नहीं है या हैं भी तो उसका उपयोग नहीं हो रहा है। कर्मचारियों को प्रोत्साहित करने एवं उनसे काम कराने की कला का अभाव नेता एवं अधिकारियों में है |पटना में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग था, जो ट्रेनिंग हेतु एक शीर्ष संस्थान का निर्माण एवं संचालन करता था, जिसमें मेडिकल ऑफिसर एवं मुख्य चिकित्सा पदाधिकारियों को सेवाकालीन ट्रेनिंग दी जा रही थी। यह (एन.आई.आई.एच.डब्ल्यू.) राष्ट्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संस्थान की देखरेख में उसके अनुरूप बना था और इसकी कार्यशैली भी, परन्तु कालांतर में सरकार ने उसके महत्व को नजरंदाज कर दिया । इसे हेल्थ सिस्टम रिसर्च, हेल्थ मॉनीटरिंग, अनुश्रवण एवं मूल्यांकन के लिए उपयुक्त केन्द्र के रूप में विकसित करना था, परन्तु विभागीय उपेक्षा एवं सरकार की राजनैतिक उदासीनता के कारण सब वैसे ही रह गया।

उन्होंने कहा कि आज की हालत में बिहार सरकार की कमी है तो वह प्रबंधन की है, जिसे समय रहते ठीक किया जा सकता था।
दिल्ली, महाराष्ट्र जैसे अन्य राज्यों में जहां कोरोना संक्रमण बेहिसाब था और लोग विस्थापित हो रहे थे, वहां के प्रबंधन एवं इच्छाशक्ति के कारण स्थिति काफी सुधार की तरफ है। बिहार सरकार चुनाव प्रबंधन बूथ स्तर तक करती है, परंतु स्वास्थ्य का प्रबंधन जिला स्तर तक भी नहीं, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।

 

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