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भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए संजीवनी है ‘अर्थक्रान्ति प्रस्ताव’ : अनिल बोकिल

मरणासन्न भारतीय अर्थव्यवस्था को कैसे मिलेगी तत्काल संजीवनी, जानिए अनिल बोकिल के फॉर्मूले से :

पद्मपति शर्मा, जयप्रकाश मिश्र

कोविड-19 के चलते मरणासन्न हो चुकी देश की माली हालत में तात्कालिक सुधार के लिए ‘अर्थक्रान्ति प्रस्ताव’ के प्रवर्तक अनिल बोकिल ने भारत सरकार को जबरदस्त सुझाव देते हुए कहा कि यदि पेट्रोल-डीजल पर लगने वाले सेन्ट्रल टैक्स हटाकर उसके स्थान पर दशमलव तीन प्रतिशत बैंक ट्रान्जेक्शन शुल्क BTT ( सौ रुपये पर महज तीस पैसा ) लगा दे, तो उसकी रेवन्यू वर्तमान सिस्टम मेंं जो ढ़ाई लाख करोड़ ₹ है, वो बढ़कर छह लाख करोड़ ₹ हो जाएगी। राज्यों द्वारा उसपर टैक्स लगाने के बाद भी पेट्रोल और डीजल के प्रति लीटर के दाम क्रमशः 40 और 35 ₹ हो जाएंगे। इससे न सिर्फ ऑटोमोबाइल और ट्रांसपोर्ट, बल्कि कई अन्य सेक्टरो में भी जबरदस्त उछाल देखने को मिलेगी।

भारतीय अर्थव्यवस्था के लिये संजीवनी है-‘अर्थक्रान्ति प्रस्ताव’

इस विषय पर एबी फाउंडेशन, दिल्ली की ओर से 26 जुलाई को आयोजित वेबिनार में देशभर से सैकड़ों लोगों की मौजूदगी में मुख्य वक्ता अर्थक्रान्ति प्रतिष्ठान के संस्थापक अनिल बोकिल ने कोरोना महामारी के कारण देश और दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव और उसके समाधान पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि चीन और अमेरिका जैसे शक्तिशाली देशों के मध्य शीतयुद्ध के कारण दुनिया की अर्थव्यवस्था पर खतरे के बादल मंडराने लगे हैं। देश की अर्थव्यवस्था और उससे संबंधित अनेक समस्याओं के समाधान के लिए वर्तमान ‘दोषपूर्ण कर प्रणाली’ में बदलाव को ‘अर्थक्रान्ति प्रस्ताव’ के जनक अनिल बोकिल ने जरूरी बताया।

बोकिल ने आगे बताया कि दुनिया के अनेक देशों में जहां GST लागू है, उनकी जनसंख्या अधिकतम 27 करोड़ तक है। अमेरिका ने, जिसकी जनसंख्या 32 करोड़ है, GST को अस्वीकार कर दिया। GST के जिस कनाडा मॉडल को देश में अपनाया गया है, उसकी आबादी मात्र 3.5 करोड़ है।

उन्होंने बताया कि वर्तमान कर प्रणाली ही देश में भ्रष्टाचार, कालेधन, अपराध, आतंकवाद, राजकोषीय घाटा, विकास के लिए विदेशी बैंकों पर निर्भरता आदि समस्याओं का मुख्य कारण है। इन समस्याओं का समाधान ‘अर्थक्रान्ति प्रस्ताव’ के अनुसार बताते हुए उन्होंने अंतरराष्ट्रीय व्यापार संतुलन को ध्यान में रखकर कस्टम ड्यूटी को छोड़ केंद्र, राज्य एवं स्थानीय प्रशासन के सभी टैक्स समाप्त करके मात्र 2 प्रतिशत बैंक ट्रान्जेक्शन टैक्स लगाने का सुझाव दिया। जैसा कि चाणक्य ने कहा था, “सरकार को टैक्स वैसे ही लेना चाहिए, जैसे मधुमक्खी फूलों से शहद लेती है, बिना उनको नुकसान पहुंचाए ।” यह टैक्स तभी लगेगा, जब खाते में रुपया जमा होगा। मात्र 2 प्रतिशत टैक्स से सरकार को RBI के आंकड़ों के अनुसार, 40 लाख करोड़ ₹ का राजस्व प्राप्त होगा। जबकि सभी प्रकार के टैक्स लगाने के बाद केंद्र, राज्य एवं स्थानीय प्रशासन को कुल 41 लाख करोड़ ₹ का राजस्व ही मिल पाता है।

इसके साथ ही, उन्होंने 100 से बड़े नोट बंद करने की सलाह दी और बताया कि ऐसा होते ही भ्रष्टाचार, कालेधन, अपराध, आतंकवाद, नकली नोट आदि समस्याओं पर अंकुश लग जायेगा। साथ ही, ऐसा प्रावधान करना होगा कि 2000 से अधिक के नकद लेनदेन को कानूनी सुरक्षा नहीं प्राप्त होगी। इसका परिणाम यह होगा कि नकद लेनदेन घट जाएगा और डिजिटल ट्रांजेक्शन में बेतहाशा वृद्धि होगी। इसके परिणामस्वरूप आगे चलकर बैंक ट्रांजेक्शन टैक्स भी 2 प्रतिशत से कम हो जाएगा।

अनिल बोकिल ने पेट्रोल व डीजल के दाम घटाने के लिए सुझाव दिया कि केंद्र सरकार अपना एक्साइज टैक्स हटा ले और उसके बदले 0.3 प्रतिशत BTT लगा दे, तो उसे 6 लाख करोड़ ₹ का राजस्व प्राप्त होगा जबकि पेट्रोल-डीजल से उसे मात्र 2.5 लाख करोड़ ₹ ही राजस्व मिलता है। इससे सामान के दाम भी घटेंगे और जनता को बहुत राहत मिलेगी।

कार्यक्रम के अंत में लोगों ने अनेक प्रश्न पूछे और बोकिल ने एक प्रश्न के उत्तर में बताया कि ब्राजील में 2001 में BTT लागू किया गया, लेकिन बड़े नोट नहीं बंद किये गए, जिसके कारण अप्रत्याशित परिणाम नहीं मिले। वर्तमान में MSME सेक्टर की दयनीय स्थिति का कारण बताते हुए उन्होंने कहा कि अनेक देशों में व्यापारियों और उद्योगपतियों को 2-3 प्रतिशत वार्षिक की दर से ऋण मिल जाता है, इसलिए भारतीय उद्योग उनका मुकाबला नहीं कर पाते। ‘अर्थक्रान्ति प्रस्ताव’ यदि सरकार ने लागू किया, तो हमारे देश के व्यापारियों को भी 2-3 प्रतिशत वार्षिक की दर से ऋण मिलने लगेगा और वे विदेशी उद्योगों का मुकाबला करने में सक्षम हो जाएंगे।

एक प्रश्न के उत्तर मे बोकिल ने कहा कि आठ- दस महीने तक एक सौ के नोट छापने के बाद ‘अर्थक्रान्ति प्रस्ताव’ लागू करना घातक होगा। बडे़ नोट धीरे-धीरे बंद किये जा सकते हैं। वैसे भी एक साल से दो हजार के नोटों की छपाई बंद हो चुकी है। आप बाद में पांच और दो सौ के नोटों की भी छपाई बंद कर सकते हैं। मृत्युशैय्या पर पड़ी इस अर्थव्यवस्था मेंं विलंब से उसका इलाज नहीं, पोस्टमार्टम ही हो सकेगा। इसलिए, इस प्रस्ताव को तत्काल लागू करने की जरूरत है।

इस वेबिनार मेंं आलोक शर्मा राष्ट्रीय प्रवक्ता कांग्रेस, आईपी सिंह राष्ट्रीय प्रवक्ता समाजवादी पार्टी, एमएलसी अशोक धवन प्रमुख नेता भाजपा, सीए नारायण खेमका, ध्रुव अग्रवाल, प्रमोद राम त्रिपाठी, प्रदीप चौरसिया एवं विजय आदि पैनेलिस्ट मौजूद रहे।

एबी फाउण्डेशन के संस्थापक सीए सीके मिश्रा ने पैनेलिस्टों का शुरू में परिचय दिया और विजय ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया ।

वरिष्ठ पत्रकार दीपक शर्मा, रवि पांडे, राजेश पाण्डेय, दिशा शुक्ला एडवोकेट, अमित शर्मा, ममता शुक्ला, अंजली दीक्षित, भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय एडवोकेट, शिव शंकर दास और आनंद सिंह एडवोकेट ने अनिल बोकिल से सवाल पूछे।

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