आज विश्व कविता दिवस है,
सब अपने ढंग से मना रहे हैं।
भारत में भी कविता दिवस मन रहा है,
उत्तर भारत में कुछ ज्यादा ही मन रहा है।
कोई कवि अपनी कविताएं बेच रहा है,
कोई स्वयंभू कवि रचनाएं खरीद रहा है।
कोई कवि अपनी कविता दान दे रहा है,
कोई अपने नाम से वही छपवा रहा है।
आज विश्व कविता दिवस है,
सब अपने ढंग से मना रहे हैं।
कभी मंच पर कवि और कविता होती थी,
आज मंच पर कमेडी और कमेडियन भी हैं।
कभी अखिल विराट कवि सम्मेलन होते थे,
आज तो हाहाकारी कवि सम्मेलन हो रहे हैं।
पहले मंच तक चाय पानी की ही पहुँच थी,
आज कई जगह शाम की दवाई भी रहती है।
आज विश्व कविता दिवस है,
सब अपने ढंग से मना रहे हैं।