डेस्क:दिवाली का पर्व केवल दीप जलाने और खुशियां मनाने का अवसर नहीं है, बल्कि यह सुख-समृद्धि, धन-धान्य और मंगलकामना का भी विशेष त्योहार है। इस दिन घरों से लेकर दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों तक मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। मान्यता है कि विधि-विधान और श्रद्धा के साथ की गई लक्ष्मी पूजा से घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। हालांकि, पूजा के दौरान सही स्थान का चयन, चौकी की स्थापना और पूजन सामग्री की व्यवस्था का भी विशेष महत्व माना गया है। अगर आप भी इस दिवाली मां लक्ष्मी की पूजा की तैयारी कर रहे हैं, तो जानिए घर में किस दिशा में पूजा करना शुभ माना जाता है और पूजन की संपूर्ण विधि क्या है। घर के ईशान कोण में करें मां लक्ष्मी की पूजा
वास्तु मान्यताओं के अनुसार, दिवाली पर मां लक्ष्मी की पूजा के लिए घर का ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा सबसे शुभ मानी जाती है। इस दिशा को सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए उपयुक्त माना गया है। वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार, घर के इस हिस्से में साफ-सुथरी जगह चुनकर पूजा स्थल तैयार करना चाहिए। पूजा से पहले स्थान की अच्छी तरह सफाई करें और वहां श्रद्धापूर्वक मां लक्ष्मी तथा भगवान गणेश की स्थापना करें।
ऐसे तैयार करें पूजा की चौकी
लक्ष्मी पूजन के लिए सबसे पहले पूजा स्थल पर आटे से अष्टदल कमल बनाएं। इसके बाद एक चौकी पर लाल या पीले रंग का साफ वस्त्र बिछाएं। इस पर मां महालक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। मां लक्ष्मी के दाईं ओर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें और उनके पास सुपारी रखें। पूजा स्थल को फूलों और दीपों से सजाएं। ध्यान रखें कि पूजा की सभी तैयारियां श्रद्धा और स्वच्छता के साथ की जाएं।
लक्ष्मी पूजन के लिए जरूरी सामग्री
दिवाली की पूजा के लिए पहले से ही सभी आवश्यक सामग्री एकत्र कर लेनी चाहिए, ताकि पूजा के दौरान किसी वस्तु की कमी न रहे। इसके लिए चंदन, रोली, अबीर, गुलाल, सिंदूर, हल्दी, अक्षत, धान की लाई, धनिया, कमलगट्टा और ताजे फूल रखें।
इसके अलावा पूजा में 16 दीपक, मिठाई, बताशे, मौसमी फल और विभिन्न पकवानों की व्यवस्था करें। बहीखाता, सोने-चांदी के सिक्के, कलम-दवात और मुद्रा भी पूजन स्थल पर रख सकते हैं। यदि घर में श्रीयंत्र है, तो उसे भी पूजा में शामिल करें।
जानिए मां लक्ष्मी की पूजा की पूरी विधि
पूजा शुरू करने से पहले भगवान गणेश का स्मरण करें और उनका पूजन करें। इसके बाद माता गौरी और अष्टलक्ष्मी की पूजा करें। मां लक्ष्मी को चंदन, रोली, अक्षत, कमल का फूल और अन्य पुष्प अर्पित करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां लक्ष्मी को कमल का फूल और बिल्व पत्र चढ़ाना विशेष फलदायी माना जाता है।
पूजा के दौरान श्रीयंत्र का पूजन और श्रीसूक्त का पाठ भी विशेष महत्व रखता है। इसके बाद मां लक्ष्मी और भगवान गणेश को मिठाई, बताशे, फल तथा अन्य पकवानों का भोग लगाएं। अंत में परिवार के सभी सदस्यों के साथ मां लक्ष्मी की आरती करें और पूजा स्थल की परिक्रमा करें। श्रद्धालु अपनी परंपरा और सामर्थ्य के अनुसार पूजन सामग्री एवं विधि में बदलाव कर सकते हैं।
दुकानों और कार्यालयों में भी करें लक्ष्मी पूजन
दिवाली पर केवल घर में ही नहीं, बल्कि दुकानों, प्रतिष्ठानों और कार्यालयों में भी मां लक्ष्मी की पूजा करने की परंपरा है। व्यापारी वर्ग इस दिन अपने बहीखातों, धन और व्यावसायिक कार्यों में उपयोग होने वाली वस्तुओं का पूजन करता है। धार्मिक मान्यता है कि व्यापार और आजीविका के साधनों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने से मां लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में भी घर की तरह ही पूजा की सामग्री और विधि रखी जा सकती है। परंपरा के अनुसार, हर साल दिवाली पर नया कलश स्थापित करना शुभ माना जाता है। पुराने कलश को किसी मंदिर में अथवा जरूरतमंद व्यक्ति को दान किया जा सकता है।
धार्मिक मान्यता: मां लक्ष्मी की पूजा में सबसे महत्वपूर्ण श्रद्धा, स्वच्छता और सात्विक भाव माना गया है। पूजा की दिशा, सामग्री और विधि से जुड़ी परंपराएं अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में भिन्न हो सकती हैं। इसलिए अपनी पारिवारिक परंपरा और स्थानीय मान्यताओं के अनुसार पूजा करना उचित है।


