डेस्क: आजकल हेल्दी डाइट और प्लांट बेस्ड प्रोटीन की बात होती है तो स्प्राउट्स यानी अंकुरित अनाज का नाम जरूर आता है। मूंग, चना, मसूर और मेथी के अंकुरित दानों को लोग सुबह के नाश्ते से लेकर सलाद तक में शामिल करते हैं। इनमें प्रोटीन, फाइबर, विटामिन और कई जरूरी मिनरल्स पाए जाते हैं, जो सेहत के लिए फायदेमंद हो सकते हैं। वजन नियंत्रित रखने और शरीर को पोषण देने के लिए भी इन्हें अच्छा विकल्प माना जाता है। लेकिन क्या स्प्राउट्स हर किसी के लिए फायदेमंद हैं? क्या इन्हें रोजाना खाना सही है? दरअसल, कुछ लोगों को कच्चे स्प्राउट्स खाने से पेट की परेशानी या संक्रमण का खतरा हो सकता है। वहीं, कुछ खास स्वास्थ्य स्थितियों में इनके सेवन को लेकर सावधानी बरतना जरूरी है। आयुर्वेद में भी अंकुरित अनाज को पचने में भारी माना गया है।
आयुर्वेद में रोज स्प्राउट्स खाने को लेकर क्या कहा गया है?
प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथ ‘चरक संहिता’ में कुछ ऐसे खाद्य पदार्थों का उल्लेख मिलता है, जिन्हें रोजाना खाने की सलाह नहीं दी गई है। इसी संदर्भ में स्प्राउट्स को लेकर भी सावधानी की बात कही जाती है। आयुर्वेद के अनुसार, अंकुरित अनाज पचने में भारी हो सकते हैं। जिन लोगों का पाचन कमजोर है, उन्हें इन्हें खाने के बाद गैस, पेट फूलने या भारीपन की शिकायत हो सकती है। Experts के मुताबिक, स्प्राउट्स का सेवन व्यक्ति की पाचन क्षमता और स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखकर करना चाहिए। इन्हें बहुत अधिक मात्रा में या रोजाना खाना हर किसी के लिए सही नहीं हो सकता।
किन लोगों को कच्चे स्प्राउट्स खाने से बचना चाहिए?
गर्भवती महिलाएं और छोटे बच्चे: कच्चे स्प्राउट्स को उगाने के लिए गर्म और नम वातावरण की जरूरत होती है। यही वातावरण साल्मोनेला और ई. कोलाई जैसे बैक्टीरिया के पनपने के लिए भी अनुकूल हो सकता है। अच्छी तरह धोने के बाद भी कच्चे स्प्राउट्स से संक्रमण का खतरा पूरी तरह खत्म नहीं होता। इसलिए गर्भवती महिलाओं, छोटे बच्चों और बुजुर्गों को कच्चे स्प्राउट्स से बचना चाहिए। इन्हें अच्छी तरह पकाकर खाना ज्यादा सुरक्षित विकल्प है। कमजोर इम्यूनिटी वाले लोग: जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है या जो किसी गंभीर बीमारी से गुजर रहे हैं, उन्हें कच्चे स्प्राउट्स खाने से बचना चाहिए। संक्रमण होने पर ऐसे लोगों में परेशानी ज्यादा बढ़ सकती है। बेहतर है कि वे डॉक्टर की सलाह से ही इन्हें अपनी डाइट में शामिल करें। कमजोर पाचन शक्ति वाले लोग: अगर आपको अक्सर गैस, एसिडिटी, पेट फूलने या अपच की समस्या रहती है, तो कच्चे स्प्राउट्स सीमित मात्रा में ही खाएं या उनसे परहेज करें। इनमें मौजूद फाइबर और कुछ प्राकृतिक तत्व संवेदनशील पाचन तंत्र में परेशानी बढ़ा सकते हैं।
ऑटोइम्यून बीमारी से पीड़ित लोग: खासतौर पर अल्फाल्फा के बीज और उनके स्प्राउट्स में एल-कैनावेनाइन (L-canavanine) नाम का अमीनो एसिड पाया जाता है। यह कुछ लोगों में इम्यून सिस्टम की गतिविधि को प्रभावित कर सकता है। सिस्टमिक ल्यूपस एरिथेमेटोसस (SLE) जैसी ऑटोइम्यून बीमारी से पीड़ित लोगों में इसके सेवन को लेकर विशेष सावधानी जरूरी है। ऐसे मरीज डॉक्टर की सलाह के बिना अल्फाल्फा स्प्राउट्स न खाएं।
खून पतला करने वाली दवा लेने वाले लोग: अल्फाल्फा, ब्रोकली और क्लोवर जैसे कुछ स्प्राउट्स में विटामिन K पाया जाता है। यह खून के थक्के बनने की प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाता है। जो लोग वारफेरिन (Warfarin) जैसी ब्लड थिनर दवाएं लेते हैं, उनके लिए विटामिन K की मात्रा में अचानक बदलाव दवा के असर को प्रभावित कर सकता है। इसलिए ऐसे लोगों को अपनी डाइट में स्प्राउट्स की मात्रा अचानक नहीं बदलनी चाहिए और डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
थायरॉइड की समस्या वाले लोग: ब्रोकली, मूली, सरसों और केल जैसे क्रूसिफेरस पौधों के स्प्राउट्स में गोइट्रोजेन (Goitrogens) नामक यौगिक पाए जा सकते हैं। इनका बहुत अधिक मात्रा में कच्चा सेवन आयोडीन के इस्तेमाल की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है। खासकर आयोडीन की कमी या हाइपोथायरायडिज्म से जूझ रहे लोगों को इनका सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए। इन्हें पकाने से गोइट्रोजेन का प्रभाव कम हो सकता है।
स्प्राउट्स खाने के क्या फायदे हैं?
सही तरीके से तैयार किए गए स्प्राउट्स पौष्टिक डाइट का अच्छा हिस्सा हो सकते हैं। अलग-अलग अंकुरित अनाज शरीर को अलग-अलग पोषक तत्व देते हैं।
मूंग के स्प्राउट्स: इनमें विटामिन C, पोटेशियम और फाइबर पाया जाता है। ये संतुलित डाइट के जरिए हृदय स्वास्थ्य और सामान्य ब्लड प्रेशर बनाए रखने में मदद कर सकते हैं।
चना और मसूर के स्प्राउट्स: ये प्लांट बेस्ड प्रोटीन, आयरन और फाइबर के अच्छे स्रोत हैं। इनसे शरीर को ऊर्जा मिलती है और पाचन को बेहतर रखने में मदद मिल सकती है।
मेथी के स्प्राउट्स: पारंपरिक रूप से मेथी का इस्तेमाल पाचन और ब्लड शुगर मैनेजमेंट के लिए किया जाता रहा है। हालांकि, स्प्राउट्स से ब्लड शुगर नियंत्रित होने की गारंटी नहीं है। डायबिटीज के मरीज अपनी दवाएं जारी रखें और डॉक्टर की सलाह लें।
अंकुरित साबुत अनाज: गेहूं, जौ और क्विनोआ जैसे अनाजों को अंकुरित करने से उनमें कुछ पोषक तत्वों की उपलब्धता और पचने की क्षमता बदल सकती है। हालांकि, गेहूं और जौ में ग्लूटेन मौजूद रहता है, इसलिए सीलिएक बीमारी वाले लोगों के लिए ये सुरक्षित नहीं हैं।
क्या रोजाना स्प्राउट्स खाना सही है
अगर आप स्वस्थ हैं और आपका पाचन ठीक रहता है, तो संतुलित मात्रा में स्प्राउट्स अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं। लेकिन इन्हें रोजाना खाना जरूरी नहीं है। अपनी डाइट में दालें, फल, सब्जियां, साबुत अनाज और दूसरे प्रोटीन स्रोत भी शामिल करें। अगर स्प्राउट्स खाने के बाद लगातार गैस, पेट दर्द या एसिडिटी होती है, तो इनका सेवन कम करें और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से संपर्क करें।स्प्राउट्स को हेल्दी और सुरक्षित तरीके से कैसे तैयार करें
स्प्राउट्स का पूरा फायदा लेने के लिए उनकी सफाई और तैयारी पर ध्यान देना बेहद जरूरी है।
अच्छी तरह पकाकर खाएं: कच्चे स्प्राउट्स की जगह उन्हें भाप में पकाकर या अच्छी तरह उबालकर खाना ज्यादा सुरक्षित है। इससे हानिकारक बैक्टीरिया का खतरा कम होता है।
साफ पानी का इस्तेमाल करें: अनाज और दालों को भिगोने के लिए साफ पीने योग्य पानी का इस्तेमाल करें। अंकुरित करने के दौरान बर्तन और हाथ भी साफ रखें।
सही तरीके से स्टोर करें: स्प्राउट्स तैयार होने के बाद उन्हें फ्रिज में रखें और लंबे समय तक कमरे के तापमान पर न छोड़ें। बदबू आने या चिपचिपे होने पर उन्हें न खाएं।
हल्के मसालों के साथ बनाएं: पके हुए स्प्राउट्स में जीरा, हल्दी और थोड़ा घी मिलाकर खा सकते हैं। इससे स्वाद भी बढ़ेगा और भोजन को पचाना कुछ लोगों के लिए आसान हो सकता है।
कुल मिलाकर, स्प्राउट्स पोषण से भरपूर जरूर हैं, लेकिन हर व्यक्ति के शरीर और पाचन क्षमता पर इनका असर एक जैसा नहीं होता। इसलिए इन्हें सही मात्रा में, साफ-सफाई का ध्यान रखते हुए और जरूरत के अनुसार पकाकर खाना बेहतर है। खास स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे लोग इन्हें अपनी डाइट में शामिल करने से पहले डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह जरूर लें।


