डेस्क: बांग्लादेश (Bangladesh) में बेहतर वेतन की मांग को लेकर रविवार को हजारों गारमेंट फैक्ट्री मजदूर सड़कों पर उतर आए। ढाका और गाजीपुर (Dhaka and Gazipur) में प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़क गई। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस के वाहन को आग के हवाले कर दिया और पुलिसकर्मियों पर हमला किया। हालात बिगड़ने के बाद ढाका में पुलिस ने 19 लोगों को हिरासत में लिया है। मजदूरों की मांग है कि उनका न्यूनतम मासिक वेतन बढ़ाकर 30 हजार बांग्लादेशी टका (करीब 23 हजार रुपये) किया जाए। हिंसा और तनाव के चलते दोनों शहरों में करीब 80 गारमेंट फैक्ट्रियां बंद कर दी गईं।
गाजीपुर में प्रदर्शनकारियों ने ढाका-टांगाइल हाईवे जाम कर दिया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (बीजीबी) की पांच प्लाटून तैनात की गईं। बांग्लादेश की गारमेंट इंडस्ट्री में करीब चार हजार पंजीकृत फैक्ट्रियां हैं, जिनमें 40 लाख से अधिक लोग काम करते हैं।
पुलिस वाहन में लगाई आग, 19 हिरासत में
ढाका के मीरपुर इलाके में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प के बाद पुलिस के एक वाहन को आग लगा दी गई। पुलिसकर्मियों पर भी हमला किया गया। पुलिस और स्थानीय लोगों की समझाइश के बाद दोपहर करीब दो बजे मजदूरों ने सड़क से जाम हटा लिया।
मीरपुर डिवीजन के डिप्टी कमिश्नर हसन मोहम्मद नाशेर रिकाबदार ने बताया कि अब तक 19 लोगों को हिरासत में लिया गया है। पुलिस वाहन जलाने और पुलिसकर्मियों पर हमले के मामले में कई मुकदमे दर्ज किए जाएंगे।
वहीं, गाजीपुर में कपड़े के कचरे से भरे एक फैक्ट्री गोदाम और पिकअप वैन में भी आग लगा दी गई। सुबह फैक्ट्रियां सामान्य रूप से खुली थीं, लेकिन दोपहर से पहले हालात बिगड़ने लगे। मजदूरों ने काम बंद कर दिया और कई स्थानों पर फैक्ट्रियों के बाहर नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया। तनाव बढ़ने के बाद ढाका और गाजीपुर में 80 फैक्ट्रियां बंद कर दी गईं।
फैक्ट्री प्रबंधन पर बातचीत नहीं करने का आरोप
बांग्लादेश गारमेंट्स एंड स्वेटर्स वर्कर्स ट्रेड यूनियन सेंटर के कानूनी मामलों के सचिव खैरुल मामून ने बताया कि मजदूरों की शिकायत है कि फैक्ट्री प्रबंधन की ओर से उनकी मांगों पर बातचीत के लिए कोई प्रतिनिधि सामने नहीं आया। इससे नाराजगी बढ़ी और कई जगह प्रदर्शन उग्र हो गया। तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए कई फैक्ट्रियों ने छुट्टी घोषित कर दी।
इस बीच श्रम एवं रोजगार मंत्री अरिफुल हक चौधरी ने मजदूरों से काम पर लौटने की अपील की है। उन्होंने बताया कि सरकार ने न्यूनतम वेतन निर्धारित करने के लिए नए वेतन बोर्ड का गठन कर दिया है।
मंत्री के मुताबिक, सरकार मजदूरों की मांगों को गंभीरता से ले रही है। वेतन बोर्ड में मजदूरों की ओर से सुझाए गए प्रतिनिधियों को भी जगह दी गई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अब मजदूर सड़क पर प्रदर्शन बंद कर फैक्ट्रियों में काम शुरू करेंगे।
बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था के लिए अहम है गारमेंट उद्योग
बांग्लादेश दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कपड़ा निर्यातक देश है। इस मामले में वह चीन के बाद दूसरे स्थान पर है। देश की अर्थव्यवस्था में गारमेंट उद्योग की महत्वपूर्ण भूमिका है। वित्त वर्ष 2025-26 में बांग्लादेश का गारमेंट निर्यात 38.70 अरब डॉलर रहा। यहां तैयार होने वाले कपड़े 150 से अधिक देशों में भेजे जाते हैं।
ऐसे में मजदूरों का आंदोलन और फैक्ट्रियों का बंद होना बांग्लादेश के कपड़ा उद्योग के लिए चुनौती बन सकता है। वेतन बढ़ाने की मांग और सरकार की ओर से नए वेतन बोर्ड के गठन के बीच अब सबकी नजर मजदूर संगठनों और फैक्ट्री प्रबंधन के बीच होने वाली बातचीत पर है।


