डेस्क:रामपुर। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री मोहम्मद आजम खान की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। शनिवार को रामपुर जिला जेल से रिहाई मिलते ही प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम ने जेल गेट के बाहर ही उन्हें एक अन्य मामले में गिरफ्तार कर लिया। वहीं, उनके साथ रिहा हुए उनके बेटे और पूर्व विधायक अब्दुल्ला आजम खान जेल से बाहर आ गए हैं। गौरतलब है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट से दो पैन कार्ड से जुड़े मामले में आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को राहत मिलने के बाद शनिवार को उनकी रिहाई के आदेश पर अमल हुआ था। जौहर यूनिवर्सिटी वित्तीय अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है केस
प्रवर्तन निदेशालय की यह कार्रवाई मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय से जुड़े मामलों को लेकर हुई है:
14 अक्टूबर को नामजदगी: ईडी ने 14 अक्टूबर 2026 को आजम खान को जौहर विश्वविद्यालय के निर्माण में वित्तीय अनियमितताओं, सरकारी फंड के कथित दुरुपयोग और मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत दर्ज मामले में नामजद किया था।
गेट से ही हिरासत: शनिवार को जैसे ही कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद वे जेल की दहलीज से बाहर निकले, वहां पहले से मौजूद केंद्रीय जांच एजेंसी के अधिकारियों ने उन्हें अपनी हिरासत में ले लिया।
‘क्या मुसलमान होना और यूनिवर्सिटी बनाना ही गुनाह है?’: आजम खान
गिरफ्तारी के वक्त मीडिया से मुखातिब होते हुए आजम खान ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की और इसे बदले की भावना से की गई कार्रवाई बताया:
“अब कहने के लिए बचा ही क्या है? मैं क्या कह सकता हूं? कानून का तो अब कोई वजूद ही नहीं रह गया है। क्या मुसलमान होने की यही सजा है? हमारी गलती बस इतनी थी कि एक मुसलमान ने यूनिवर्सिटी बनाई। यही हमारा गुनाह है। हमने बच्चों के लिए स्कूल बनाए, क्या यही हमारा जुर्म है?”
सपा के वरिष्ठ नेता की इस त्वरित गिरफ्तारी के बाद उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों में एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है।


