डेस्क: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने शनिवार को आरोप लगाया कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के निर्देश पर निर्वाचन आयोग चला रहे हैं और विपक्ष देश के लोगों के मताधिकार तथा निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता की रक्षा के लिए पूरी ताकत से लड़ाई लड़ रहा है।
खरगे ने ‘जन महाभियोग’ कार्यक्रम में मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ एक ”प्रस्ताव” रखते हुए यह भी कहा कि विपक्ष का ज्ञानेश कुमार से कोई निजी बैर नहीं है, बल्कि उसकी मांग है कि आयोग स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से काम करे। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने सत्ता बरकरार रखने के लिए ”साजिश” रची है और निर्वाचन प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास किया जा रहा है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, ”ज्ञानेश कुमार प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के निर्देश पर निर्वाचन आयोग को चला रहे हैं… हमारा उनसे कोई निजी बैर नहीं है। हम सिर्फ यह चाहते हैं कि निर्वाचन आयोग निष्पक्ष तरीके से काम करे और देश के लोगों के मताधिकार की रक्षा हो।” उन्होंने दावा किया कि सीईसी के खिलाफ संसद में विपक्ष की ओर से नोटिस दिया गया था और यह कदम निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता तथा मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए उठाया गया है।
खरगे ने वर्ष 2023 के मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित कानून का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि इसे ”जबरन पारित” कराया गया तथा इसी कानून के कारण ज्ञानेश कुमार कथित तौर पर ”वोट चोरी” कर पा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि ”वोट चोरी” पकड़े जाने के बाद मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया शुरू की गई।
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि विपक्ष की लड़ाई मतदाता सूची में ”घुसपैठियों” के नाम जोड़ने के लिए नहीं, बल्कि वास्तविक और पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में बनाए रखने के लिए है। खरगे ने इस बात पर जोर दिया कि विपक्ष जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी ताकत लगाएगा और निर्वाचन प्रक्रिया की निष्पक्षता से कोई समझौता नहीं होने देगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार निर्वाचन आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की स्वतंत्रता को प्रभावित कर रही है, जबकि लोकतंत्र में चुनाव प्रक्रिया पर जनता का भरोसा बनाए रखना जरूरी है।


