डेस्क: हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता अशोक कुमार (Ashok Kumar) को दर्शक दादामुनि के नाम से भी जानते हैं। उन्होंने अपने लंबे फिल्मी करियर में नायक और खलनायक दोनों तरह की भूमिकाएं निभाकर अलग पहचान बनाई थी। हालांकि, अशोक कुमार (Ashok Kumar) की विरासत केवल उनकी फिल्मों तक सीमित नहीं रही। उनके परिवार के कई सदस्यों ने भी अभिनय की दुनिया में कदम रखा। उनकी तीन बेटियों ने फिल्मों में काम किया, जबकि दामाद देवेन वर्मा (Deven Verma) ने अपनी कॉमेडी और सहायक भूमिकाओं से दर्शकों का मनोरंजन किया। उनकी नातिन अनुराधा पटेल (Anuradha Patel) भी हिंदी फिल्मों में नजर आईं और उन्होंने सलमान खान (Salman Khan) की फिल्म रेडी (Ready) में उनकी मां की भूमिका निभाई थी।
अशोक कुमार का जन्म 13 अक्टूबर 1911 को बिहार के भागलपुर में एक बंगाली ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनके पिता कुंजल गांगुली पेशे से वकील थे, जबकि मां गौरी देवी गृहिणी थीं। अशोक कुमार अपने भाई-बहनों में सबसे बड़े थे। उनके छोटे भाइयों में अनूप कुमार और किशोर कुमार शामिल थे। किशोर कुमार को हिंदी फिल्म संगीत के लोकप्रिय गायकों में गिना जाता है। उनकी बहन सती देवी का रिश्ता भी फिल्मी परिवार से जुड़ा रहा। सती देवी, अभिनेत्री काजोल की दादी थीं।
अशोक कुमार ने वर्ष 1938 में शोभा से विवाह किया था। उनके चार बच्चे हुए, जिनमें एक बेटा और तीन बेटियां शामिल थीं। बेटे अरूप कुमार ने वर्ष 1962 में आई फिल्म बेजुबान में अभिनय किया था। हालांकि, फिल्म को सफलता नहीं मिली और इसके बाद उन्होंने फिल्मी करियर के बजाय कारोबार की दुनिया में अपना ध्यान लगाया।
उनकी बड़ी बेटी भारती पटेल ने भी परिवार और फिल्म जगत के बीच संबंध बनाए रखा। उन्होंने मुंबई के प्रसिद्ध हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. वीरेंद्र पटेल से शादी की थी। इस दंपती के दो बच्चे हुए, जिनमें बेटा राहुल और बेटी अनुराधा पटेल शामिल हैं। अनुराधा ने आगे चलकर अभिनेत्री के रूप में अपनी पहचान बनाई और कई हिंदी फिल्मों में काम किया।
अनुराधा पटेल ने वर्ष 1983 में रिलीज हुई फिल्म लव इन गोवा से अभिनय की शुरुआत की थी। इसके बाद वह रेखा और नसीरुद्दीन शाह की फिल्म इजाजत में दिखाई दीं। इस फिल्म में उन्होंने माया नाम की युवती का किरदार निभाया था। फिल्म का गीत मेरा कुछ सामान तुम्हारे पास पड़ा है भी उनके किरदार से जुड़ा हुआ है। अनुराधा पटेल ने बाद में सलमान खान अभिनीत फिल्म रेडी में उनकी मां की भूमिका निभाई। इस तरह अशोक कुमार की नातिन ने भी हिंदी सिनेमा में अपनी अलग जगह बनाई।
अशोक कुमार की दूसरी बेटी रूपा वर्मा ने भी कुछ फिल्मों में अभिनय किया था। उन्होंने अभिनेता देवेन वर्मा से शादी की, जो हिंदी सिनेमा में अपनी हास्य भूमिकाओं के लिए लोकप्रिय रहे। देवेन वर्मा ने अंगूर और गोलमाल जैसी फिल्मों में यादगार अभिनय किया। सहायक भूमिकाओं और कॉमेडी के जरिए उन्होंने दर्शकों के बीच खास पहचान बनाई। वर्ष 2014 में उनका निधन हो गया था।
अशोक कुमार की सबसे छोटी बेटी प्रीति गांगुली ने भी पिता की तरह अभिनय को अपना पेशा बनाया। उन्होंने वर्ष 1974 में रिलीज हुई फिल्म धुंए की लकीर से फिल्मों में कदम रखा था। इसके बाद वह खेल खेल में, दिल्लगी, खट्टा मीठा और चोर के घर का चोर जैसी फिल्मों में नजर आईं। प्रीति को खास तौर पर उनकी हास्य भूमिकाओं के लिए याद किया जाता है।
इस तरह अशोक कुमार के परिवार की कई पीढ़ियों ने हिंदी सिनेमा में योगदान दिया। खुद दादामुनि से लेकर उनकी बेटियों, दामाद और नातिन तक, परिवार के सदस्यों ने अलग-अलग भूमिकाओं के जरिए दर्शकों के बीच पहचान बनाई।


