डेस्क:समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव गुरुवार को रामपुर जेल में बंद पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान से मुलाकात करने जा रहे हैं। इस मुलाकात को ‘एम’ यानी मुस्लिम समीकरण को सहेजने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है। वहीं इस मुलाकात को लेकर अब सियासी बयानबाजी भी तेज हो गई है। पटना में बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने इस मुलाकात पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव और आजम खान की यह मुलाकात दरअसल समाजवादी पार्टी के उसी पुराने, बदहाल, माफिया और दंगा राज को फिर से जिंदा करने की हताश कोशिश है। संजय सरावगी ने कहा, “जब-जब चुनाव नजदीक आते हैं, समाजवादी पार्टी को अपने उन लोगों की याद आती है, जिनके दौर में उत्तर प्रदेश में कानून का राज नहीं बल्कि तुष्टिकरण और जमीनों पर अवैध कब्जे का राज चलता था। उत्तर प्रदेश की प्रबुद्ध जनता सीएम योगी आदित्यनाथ के सुशासन और विकास के साथ खड़ी है। इन पुराने दागी चेहरों को इकट्ठा करने से समाजवादी पार्टी की तय हार टलने वाली नहीं है।”
उन्होंने आजम खान के पिछले कार्यकाल पर सवाल उठाते हुए कहा, “आजम खान क्या थे उस समय? गुंडाराज, जंगलराज, माफिया राज, जमीन कब्जा ही उनकी पहचान थी। इसलिए उत्तर प्रदेश की जनता ये सब अच्छी तरह समझ चुकी है और जान चुकी है कि सपा का असली चेहरा क्या है।”
वहीं, मुंबई में भाजपा नेता राम कदम ने भी अखिलेश यादव पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले अखिलेश यादव पूरी तरह से भ्रम में हैं। अयोध्या सीट को लेकर उन्होंने अखिलेश पर तंज कसा। राम कदम ने कहा, “जब अयोध्या की बारी आई तो शुरू में अखिलेश कह रहे थे कि चुनाव लड़ूंगा लेकिन जब सीएम योगी ने उन्हें चुनौती दी और खुद उनके सामने अयोध्या से लड़ने के लिए तैयार हो गए, तो एक माह बाद भी अखिलेश की चुप्पी नहीं टूटी। वह जानते हैं कि सीएम योगी के सामने अयोध्या या कहीं से भी लड़ें, उन्हें हार का सामना करना पड़ेगा।”
उन्होंने कहा, “यही डर अखिलेश यादव की बिगड़ती हुई भाषा का कारण है। कभी चवन्नी कहते हैं, कभी पिछड़ों को लेकर गलत टिप्पणी करते हैं। और अब जब उनका बचा-खुचा जनाधार भी समाप्त हो रहा है, तब जेल में बंद असामाजिक तत्वों के कारण कारावास में रहने वाले आजम खान जैसे लोगों से मिलकर शायद किसी एक खास तबके को खुश करने का प्रयास कर रहे हैं।” उन्होंने जोर देकर कहा, “आजम खान से मिलें या और किसी और से, उत्तर प्रदेश की जनता ने तय कर लिया है कि गुंडागर्दी करने वाले लोगों के लिए उस भूमि पर कोई जगह नहीं है।”
पटना में जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने भी इस मुलाकात को लेकर सपा को घेरा। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में कुछ भी बदलने नहीं जा रहा है और एनडीए गठबंधन की फिर से सत्ता में वापसी होगी।
राजीव रंजन ने कहा, “विधानसभा चुनाव में उनके इस भ्रम का निवारण हो जाएगा। जनता अखिलेश यादव की राजनीति में विकास को दूर-दूर तक नहीं देखती। कभी पंडित, कभी पिछड़ा कहकर सबको साधने की उनकी जो कोशिश रहती है, उसे मतदाताओं ने गंभीरता से नहीं लिया है। सीएम योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में एनडीए को एकतरफा बढ़त मिलती दिख रही है। इसलिए अगली सरकार एक बार फिर सीएम योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में ही बनेगी। प्रधानमंत्री मोदी और सीएम योगी की जोड़ी पर जनता को पूरा भरोसा है।”
उधर, लखनऊ में कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने इस मुलाकात को पारिवारिक और भावनात्मक रिश्ता करार दिया। सुरेंद्र राजपूत ने कहा, “यह पारिवारिक संबंध है, पिता-पुत्र जैसा संबंध है। आजम खान मुलायम सिंह यादव के साथी हैं। अखिलेश यादव अपने घर के चाचा से मिलने जा रहे हैं।”
उन्होंने भाजपा सरकार पर आजम खान के उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए कहा, “आजम खान के खिलाफ जो अत्याचार, जो आतंक और जो गंदा काम भारतीय जनता पार्टी कर रही है, उन्हें मुर्गी चोर बताया जा रहा है, किताब चोर बताया जा रहा है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है। इस उत्पीड़न के खिलाफ आजम खान को मानसिक संबल देने के लिए अखिलेश यादव वहां जा रहे हैं।” सुरेंद्र राजपूत ने कहा कि इस तरह की मुलाकातें होती रहनी चाहिए, ताकि इस सरकार के अहंकार और दमनकारी शासन का जल्द से जल्द अंत हो सके।


