उत्तर प्रदेश

केस नंबर 2047′ और विकसित भारत – सीएम योगी ने कानूनी अंदाज में रखा विकास का ब्लूप्रिंट

डेस्क:उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को लखनऊ में डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय में आयोजित 5वें दीक्षांत समारोह को संबोधित किया। सीएम योगी ने कानून के विद्यार्थियों के सामने विकसित भारत का खाका कानून की भाषा में ही खींचा। उन्होंने कहा कि अगर हम मान लें कि हमारा केस नंबर 2047 है, उसका विषय विकसित भारत है, उसके याची 140 करोड़ भारतवासी हैं और उन याची के अधिवक्ता के रूप में अगर आपको इस दलील को आगे बढ़ाना है तो आपकी क्या स्थिति होगी? क्योंकि आपके मन में बहुत सारे सवाल आ रहे हैं, जैसे कि विकास के लिए दलील, विकास के लिए वकील…आदि। उन्होंने कहा कि जब हम विकसित भारत की बात करते हैं तो याद रखना 140 करोड़ लोगों के दावे को तथ्य, साक्ष्य, तर्क और एक ईमानदार वकील चाहिए। इस केस का प्रतिवादी कोई व्यक्ति नहीं है, कोई दल भी नहीं है…प्रतिवादी है वे लोग जो यथास्थितिवादी हैं, जो ये मानकर चले हैं कि ऐसा कुछ हो नहीं सकता, जो कुछ भी मानने को तैयार नहीं है और कुछ भी स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं। आपको अपना ये मुकदमा उसी जिद्दी प्रतिवादी से लड़ना है जो न कोई तर्क मानता और न कोई साक्ष्य।
योगी आदित्यनाथ ने विकसित भारत की परिकल्पना को मुकदमे के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि 140 करोड़ देशवासियों के इस दावे की पैरवी तथ्यों, साक्ष्यों और ईमानदारी से करनी होगी। वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प में युवा अधिवक्ताओं की भूमिका होगी। प्रदेश को 2029-30 तक एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की कार्ययोजना तैयार है। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता काम आसान कर सकती है, लेकिन अंतिम निर्णय इंसान के विवेक से होना चाहिए। लापरवाह मसौदे से निर्दोष व्यक्ति को स्वतंत्रता गंवानी पड़ सकती है। डीपफेक और साइबर अपराधों ने साक्ष्यों की विश्वसनीयता की चुनौती पैदा की है। प्रदेश के 75 जिलों में साइबर थाने और 1,583 थानों में साइबर हेल्प डेस्क हैं। ‘एआई प्रज्ञा’ से 10 लाख युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को अन्याय के खिलाफ खड़े होने, जड़ों से जुड़े रहने और निरंतर अध्ययन की सीख दी। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि गांवों में जमीन और पारिवारिक विवादों के समाधान में योगदान दें। गलत काम का दबाव आए तो सिद्धांतों से समझौता न करें।
एलएलएम में रुपाली जायसवाल को स्वर्ण, चित्रा सिंह को रजत और सौम्या गिरी को कांस्य पदक मिला। एलएलबी ऑनर्स में तेजस्विनी कौशल को स्वर्ण, ईशा अग्रवाल को रजत और निशा वर्मा को कांस्य पदक मिला। ईशा अग्रवाल को क्रिमिनल लॉ में जस्टिस ओपी प्रधान मेमोरियल, कॉन्स्टिट्यूशनल लॉ में पद्मावती मोहनलाल जरीवाला और स्टूडेंट ऑफ द ईयर के लिए वीरेंद्र भाटिया स्वर्ण पदक मिला।

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