डेस्क : फिट और हेल्दी रहने के लिए सिर्फ एक्सरसाइज करना ही काफी नहीं है, बल्कि संतुलित डाइट भी उतनी ही जरूरी है। आप रोजाना क्या खाते हैं, इसका असर आपकी सेहत पर पड़ता है। ऐसे में जरूरी नहीं कि सेहतमंद रहने के लिए महंगे सुपरफूड्स ही खाए जाएं। कुछ पारंपरिक अनाज भी पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। बॉलीवुड अभिनेत्री अनुष्का शर्मा ने एक इंटरव्यू में बताया था कि वह गेहूं की जगह अमरंथ यानी राजगिरा के आटे की रोटी खाना पसंद करती हैं। राजगिरा प्राकृतिक रूप से ग्लूटेन-फ्री होता है और इसमें प्रोटीन समेत कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं। आइए जानते हैं राजगिरा की रोटी खाने से क्या फायदे मिल सकते हैं।
प्रोटीन का अच्छा स्रोत है राजगिरा
राजगिरा में प्रोटीन के साथ शरीर के लिए जरूरी अमीनो एसिड भी पाए जाते हैं। इसमें लाइसिन नाम का अमीनो एसिड विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। एक कप पके हुए अमरंथ में लगभग 9 ग्राम प्रोटीन हो सकता है। ऐसे में शाकाहारी लोगों के लिए यह प्रोटीन की मात्रा बढ़ाने का एक अच्छा विकल्प है। हालांकि, शरीर की रोजाना प्रोटीन की जरूरत उम्र, वजन और शारीरिक गतिविधि पर निर्भर करती है।
ग्लूटेन-फ्री डाइट लेने वालों के लिए अच्छा विकल्प
गेहूं में ग्लूटेन पाया जाता है, जबकि राजगिरा प्राकृतिक रूप से ग्लूटेन-फ्री होता है। इसलिए सीलिएक रोग से पीड़ित लोगों या डॉक्टर की सलाह पर ग्लूटेन-फ्री डाइट लेने वालों के लिए राजगिरा एक उपयोगी विकल्प हो सकता है। हालांकि, पैक्ड आटे में दूसरे अनाजों की मिलावट और क्रॉस-कंटैमिनेशन से बचने के लिए लेबल जरूर जांचें।
कई जरूरी पोषक तत्वों से भरपूर
राजगिरा में प्रोटीन के अलावा फाइबर, आयरन, मैग्नीशियम, मैंगनीज और फॉस्फोरस जैसे पोषक तत्व भी पाए जाते हैं। ये शरीर के सामान्य कामकाज, हड्डियों की मजबूती, मांसपेशियों और ऊर्जा के चयापचय में भूमिका निभाते हैं। इसे संतुलित डाइट का हिस्सा बनाने से कई जरूरी पोषक तत्वों का सेवन बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
राजगिरा में लाइसिन नाम का आवश्यक अमीनो एसिड पाया जाता है, जिसका शरीर खुद पर्याप्त मात्रा में निर्माण नहीं कर सकता। यह प्रोटीन बनाने और शरीर के ऊतकों की मरम्मत में मदद करता है। कोलेजन के निर्माण में भी अमीनो एसिड की भूमिका होती है। कोलेजन त्वचा, हड्डियों, टेंडन और अन्य संयोजी ऊतकों की संरचना और मजबूती के लिए जरूरी प्रोटीन है।
पाचन के लिए भी हो सकता है फायदेमंद
राजगिरा में मौजूद फाइबर पाचन को बेहतर बनाए रखने और मल त्याग को नियमित करने में मदद कर सकता है। हालांकि, फाइबर का सेवन अचानक बहुत ज्यादा बढ़ाने के बजाय धीरे-धीरे बढ़ाना और पर्याप्त पानी पीना बेहतर रहता है।
राजगिरा को डाइट में कैसे शामिल करें?
राजगिरा को अपनी रोजमर्रा की डाइट में कई तरीकों से शामिल किया जा सकता है।
रोटी: राजगिरा के आटे से रोटी बनाकर खा सकते हैं। इसमें ग्लूटेन नहीं होता, इसलिए आटा गूंथने और रोटी बेलने के लिए थोड़ा अभ्यास या किसी दूसरे उपयुक्त आटे के साथ मिश्रण की जरूरत पड़ सकती है।
चीला: राजगिरा के आटे में सब्जियां और मसाले मिलाकर चीला बनाया जा सकता है।
दलिया: राजगिरा को पकाकर दलिया या खिचड़ी तैयार की जा सकती है।
अन्य व्यंजन: इसे अपनी पसंद और जरूरत के अनुसार अलग-अलग व्यंजनों में शामिल किया जा सकता है।
नोट : राजगिरा पौष्टिक जरूर है, लेकिन केवल एक तरह की रोटी खाने से संपूर्ण पोषण नहीं मिलता। डाइट में अलग-अलग अनाज, दालें, सब्जियां, फल और प्रोटीन के अन्य स्रोत शामिल करना जरूरी है। अगर आपको सीलिएक रोग या कोई अन्य स्वास्थ्य समस्या है, तो अपनी डाइट में बड़ा बदलाव करने से पहले डॉक्टर या योग्य डाइटिशियन से सलाह लें।


