डेस्क: हालात से परेशान होकर अनुभवी गोलकीपर सविता पूनिया ने पिछले साल हॉकी को अलविदा कहने का फैसला कर लिया था लेकिन इस साल विश्व कप और एशियाई खेलों में ऐतिहासिक प्रदर्शन के बाद अब उन्हें पूरा यकीन है कि ओलंपिक पदक जीतने का सपना वास्तव में पूरा हो सकता है । एशियाई खेलों में 44 साल बाद भारतीय महिला हॉकी टीम ने स्वर्ण पदक जीतकर लॉस एंजिलिस ओलंपिक 2028 के लिये क्वालीफाई कर लिया है । चीन के खिलाफ फाइनल में पेनल्टी स्ट्रोक बचाकर जीत की सूत्रधार बनी सविता ने पीटीआई कार्यालय में विशेष बातचीत में कहा ,” विश्व कप में हमने ऐतिहासिक पांचवां स्थान हासिल किया । एशियाई खेलों में 44 साल बाद स्वर्ण जीता और अब लॉस एंजिलिस ओलंपिक का पदक जद में दिख रहा है ।”
भारत के लिये सर्वाधिक अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने वाली महिला हॉकी खिलाड़ी बनी सविता ने कहा ,”मेरा सपना है ओलंपिक में पोडियम पर खड़े होना और मैं लॉस एंजिलिस के लिये पूरी तरह से तैयार हूं । तोक्यो का मलाल वहां मिटेगा, इसका पूरा यकीन है ।” सविता ने बताया कि पिछले साल उन्होंने हॉकी इंडिया को ईमेल कर दिया था कि वह संन्यास लेने जा रही है लेकिन उन्हें ऐसा करने से रोका गया । उन्होंने कहा ,” मैने पिछले साल हॉकी इंडिया को ईमेल कर दिया था कि मुझे अब नहीं खेलना है लेकिन मुझे ऐसा करने से महासंघ ने रोका । मैं शिविर छोडकर घर भी चली गई थी लेकिन फिर शोर्ड मारिन कोच बनकर आये तो मुझे लगा कि अभी खेल सकती हूं ।” पद्मश्री से नवाजी जा चुकी 36 वर्ष की इस खिलाड़ी ने कहा ,” मैने हॉकी को बहुत मिस किया । उपलब्धि अपनी जगह है लेकिन आप आनंद लेकर खेलते हैं तो और अच्छा करने का मन करता है । इस कोचिंग स्टाफ के साथ तोक्यो में खेल चुके थे और लगा कि फिर खेल सकती हूं ।”
उन्होंने पिछले साल टखने की सर्जरी के बाद वापसी का श्रेय वेन लोम्बार्ड को दिया और यह भी कहा कि बेहतरीन गोलकीपिंग के लिये भले ही बिछू देवी और उनकी तारीफ हो रही है लेकिन इसके पीछे कई लोगों की मेहनत है । तीन बार एफआईएच की सर्वश्रेष्ठ गोलकीपर रह चुकी सविता ने कहा ,” हमारी गोलकीपिंग की तारीफ हो रही है लेकिन इसके पीछे कोच शोर्ड मारिन, वेन और गोलकीपिंग सलाहकार पिरमिन ब्लाक का अहम योगदान भुलाया नहीं जा सकता ।” एशियाड फाइनल में चीन के खिलाफ पेनल्टी स्ट्रोक बचाने से पहले उन्होंने ‘चक दे इंडिया’ की तरह कोच की तरफ नहीं बल्कि डगआउट में बैठी साथी गोलकीपर बिछू को देखा था । उन्होंने कहा ,’ चीन की खिलाड़ी ने विश्व कप में बायीं ओर शॉट लेकर गोल किया था । मुझे देखना था कि वह फिर बायीं ओर मारेगी या दाहिने ओर । मैने बिछू के साथ आई कांटेक्ट किया और मैच से पहले हमने तय किया था कि बायीं ओर जाना है लेकिन थोड़ा रूककर और मैने वही किया ।” टीम की मेंटोर की भूमिका भी निभा रही सविता ने स्वीकार किया कि पिछले साल तक के हालात के बाद टीम को इस मुकाम तक लाना आसान नहीं था। उन्होंने कहा ,” पिछले दो साल में काफी दिक्कतें आ रही थी । बहुत मुश्किल था इस टीम को एक ईकाई बनाना । सीनियर होने के नाते मेरी भी बड़ी जिम्मेदारी थी कि मैदान के भीतर और बाहर तालमेल बना रहे क्योंकि सफलता तभी मिलेगी जब एक दूसरे के लिये खेलें । हमने इसी पर काम किया ।” सविता ने कहा कि इस टीम ने महिला हॉकी के लिये लोगों का नजरिया बदला है लेकिन अभी शुरूआत हुई है ।
उन्होंने कहा ,” तोक्यो ओलंपिक में हम चौथे स्थान पर रहे थे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने कहा था कि यह प्रदर्शन पदक से कम नहीं है । लेकिन फिर पेरिस ओलंपिक में हम क्वालीफाई करने से चूके तो लोगों ने कहना शुरू कर दिया कि तोक्यो का प्रदर्शन तुक्का था । लेकिन हमें खुद पर भरोसा था और नये कोचिंग स्टाफ के साथ फिर हमें नयी दिशा मिल गई ।” अपने कैरियर में कई रूढियों को तोड़ने वाली सविता ने कहा कि महिला खिलाड़ियों पर शादी, गृहस्थी, बढती उम्र का दबाव भी लोग अधिक बनाने लगते हैं लेकिन सफलता हर सवाल का जवाब होती है । उन्होंने कहा ,” मैं लकी रही हूं कि परिवार ने हमेशा साथ दिया लेकिन मैने अपनी कई सहेलियों का कैरियर इसी दबाव में खत्म होते देखा है । अगर उम्र के कारण मैं खेलना छोड़ देती तो आज उस स्वर्ण पदक से चूक जाती जिसके लिये बीस साल मेहनत की है ।” हॉकी को अलविदा कहने के बाद राजनीति में जाने की संभावना से इनकार करते हुए सविता ने कहा कि वह गोलकीपिंग अकादमी खोलना चाहती है । उन्होंने कहा ,” संन्यास के बाद भी मैं हॉकी से ही जुड़ी रहूंगी ।मेरा मानना है कि घरेलू स्तर पर गोलकीपर पर उतना ध्यान नहीं दिया जाता । मैं अपनी एक गोलकीपिंग अकादमी खोलना चाहूंगी ताकि भारतीय हॉकी को अच्छे गोलकीपर दे सकूं ।”


