डेस्क: साल 2026 में पावन शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर से होने जा रही है। नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के विभिन्न नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। इस दौरान श्रद्धालु अपने घरों में कलश स्थापना करते हैं और रोजाना धूप-दीप जलाकर व्रत-अनुष्ठान संपन्न करते हैं। धार्मिक एवं वास्तु मान्यताओं के अनुसार, मां भगवती का आगमन सदैव स्वच्छ, पवित्र और सकारात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण स्थान पर ही होता है। यही वजह है कि नवरात्रि प्रारंभ होने से पूर्व घर के कोने-कोने की साफ-सफाई करने की विशेष परंपरा रही है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर में पड़ी बेकार, टूटी-फूटी और अनुपयोगी वस्तुएं नकारात्मक ऊर्जा को जन्म देती हैं। यदि आप भी इस नवरात्रि मां अम्बे की असीम कृपा प्राप्त करना चाहते हैं, तो पूजा शुरू होने से पहले निम्नलिखित चीजों को अपने घर से तुरंत बाहर कर दें:
ज्यादातर लोग घर को सुंदर दिखाने के लिए जो भी वस्तु आकर्षक लगती है, उसे अपने घर में सजा लेते हैं। वास्तुशास्त्र के नियमों अनुसार घर में कुछ चीजें ऐसी होती हैं जिन्हें घर में सजाने से पारिवारिक सदस्यों के तन, मन और धन को नुक्सान पंहुचता है। कुछ चीजों से अत्यधिक नकारात्मक उर्जा का संचार होता है जिससे घर-परिवार में कंगाली आ जाती है।
फेंगशुई में इस बात पर विशेष जोर दिया जाता है कि, अनुपयोगी वस्तुएं कबाड़ होता है और कबाड़ से घर में नकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न होती है इसलिए घर में कबाड़ होना शुभ नहीं होता। इसी कारण फेंगशुई विद्वान् इस बात की सलाह देते हैं कि, घर में घड़ी, टीवी, वाशिंग मशीन, माइक्रोवेब ओवन, मिक्सर, फ्रीज इत्यादि कोई भी वस्तु जो खराब होने के कारण उपयोग में नहीं आ रही है तो उन्हें सुधराकर रखना चाहिए और यदि उनका सुधरना सम्भव नहीं है तो उन्हें घर से हटा देना चाहिए।
घर में कांच का टूटना जितना अशुभ माना गया है अससे अधिक अशुभ है उस टूटे हुए कांच के टूकड़ों को घर में रखना। घर में टूटा आईना अथवा खिड़की टूटते ही बनवा लें अन्यता ये टूटे पड़े-पड़े घर में कर्ज अथवा धन हानि करते हैं।
घड़ी की सूईयों एवं पेंडुलम से सकारात्मक उर्जा का संचार होता है जब वो चल रही होती हैं लेकिन जब वो बंद हो जाती हैं तो उनसे नकारात्मक उर्जा का संचार होता है। फेंगशुई के अनुसार अंडाकार, गोल, अष्टभुजाकार और षट्भुजाकार घड़ी बहुत ही शुभ होती है।
देवी-देवताओं की फटी हुई और पुरानी तस्वीरें अथवा खण्डित हुई मूर्तियों से भी आर्थिक हानि होती है। अत: उन्हें किसी पवित्र नदी में प्रवाहहित कर देना चाहिए।
घर में कांटेदार पेड़-पौधे न लगाएं, इससे पारिवारिक संबंधों में भी कांटों की सी चुभन पैदा होने लगती है।


