LCWW फाउंडेशन के 3-इन-1 आयोजन में 40 प्रतिभागियों ने दिखाया पाक-कौशल, साहित्यिक योगदान के लिए रचनाकार एवं सहयोगी सम्मानित

लखनऊ : लखनऊ कनेक्शन वर्ल्डवाइड फाउंडेशन (LCWWF) की ओर से रविवार को गोमती नगर स्थित एहसास, एफ-2, विराट खंड में ‘उत्कर्ष: स्वाद से सम्मान तक’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। तीन आयामों को एक मंच पर जोड़ने वाले इस विशेष आयोजन में कुकिंग प्रतियोगिता, सामाजिक संवाद और साहित्यिक सम्मान प्रमुख आकर्षण रहे। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डॉ. के.के. अस्थाना एवं डॉ. सृष्टि श्रीवास्तव तथा विशिष्ट अतिथि श्री मुकुल महान, श्री राजीव वर्मा ‘वत्सल’ और सुश्री अलका तोमर उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण LCWW फाउंडेशन की पहली कुकिंग प्रतियोगिता ‘रसोई से यादों तक’ रही। प्रतियोगिता में 40 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। प्रतियोगिता को तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया था, जिनमें पारंपरिक व्यंजन, भूले-बिसरे व्यंजन तथा मीठी यादें शामिल रहीं। प्रतिभागियों ने घर से तैयार व्यंजन लाकर निर्धारित स्थान पर उनकी आकर्षक प्रस्तुति की। प्रतियोगिता में केवल स्वाद ही नहीं, बल्कि प्रस्तुति, सजावट और व्यंजन की विशिष्टता को भी महत्व दिया गया।
मूल्यांकन के लिए कुल 100 अंक निर्धारित थे, जिनमें स्वाद के 40, प्रस्तुति एवं सजावट के 40 तथा विशिष्टता एवं नयापन के 20 अंक रखे गए। निर्णायक मंडल में तृप्ति पांडेय, रुपाली गुप्ता और ऋचा जसवानी शामिल रहीं। प्रतियोगिता का समन्वय डॉ. मनिंदर कौर ने किया।
प्रतियोगिता के विजेता
पारंपरिक व्यंजन श्रेणी में जया श्रीवास्तव ने अपने व्यंजन ‘मीज़ा राइस’ के लिए प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि ज्योति साहू के ‘ट्रेडिशनल थाल’ को द्वितीय स्थान मिला।
मीठी यादें / स्वीट्स श्रेणी में सीमा सिन्हा ने ‘कॉर्न हलवा’ के लिए प्रथम स्थान प्राप्त किया और कीर्ति शुक्ला की ‘शकरकंद की खीर’ को द्वितीय स्थान मिला।
भूले-बिसरे व्यंजन श्रेणी में अंजू त्रिपाठी की ‘बाजरे की खिचड़ी’ प्रथम तथा निकिता गुप्ता का ‘पंगुजुआ’ द्वितीय रहा।
दर्शकों की पसंद के आधार पर ऑडियंस प्राइज विनोद श्रीवास्तव को उनके व्यंजन ‘शाही ज़र्दा’ के लिए प्रदान किया गया।
सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए।
सामाजिक सरोकार को मिला नया आयाम
कार्यक्रम के सामाजिक सरोकार वाले पक्ष में एहसास की संस्थापक एवं विशिष्ट अतिथि डॉ. (एच.सी.) शची सिंह सेठ की उपस्थिति रही। शिक्षा, बाल विकास, युवा सशक्तीकरण और सामाजिक विकास के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक समय से कार्य कर रहीं डॉ. शची सिंह सेठ ने LCWW फाउंडेशन की सामाजिक सेवा गतिविधियों से जुड़े प्रयासों की सराहना की। सामाजिक सेवा विंग के एडमिन एवं कार्यक्रम समन्वयक कैलाश कुमार श्रीवास्तव ने विंग की गतिविधियों और आगे की योजनाओं की जानकारी दी।
साहित्यिक योगदान के लिए सम्मान
कार्यक्रम में LCWWF की साहित्यिक गतिविधियों से जुड़े रचनाकारों और सहयोगियों को भी सम्मानित किया गया। महिला काव्य गोष्ठियों में सक्रिय सहभागिता के लिए अजिता गुप्ता, डॉ. शोभा दीक्षित ‘भावना’, प्रो. शोभा बाजपेई, वर्षा श्रीवास्तव, अमिता मिश्रा, शीतल बाजपेई, श्वेता श्रीवास्तव, डॉ. रीमा छाबड़ा, संध्या श्रीवास्तव, कल्पना मिश्रा, सरोज बाला सोनी, डॉ. रीमा सिन्हा, प्रो. जहाँआरा, रश्मि सिंह, नमिता सचान सुंदर, शिखा श्रीवास्तव, सीमा बाजपेई, नीरजा शुक्ला, और कविता मिश्रा को सम्मानित किया गया।
इसी क्रम में LCWW के प्रमुख साहित्यिक कार्यक्रम ‘काग़ज कलम किताब’ में सक्रिय सहभागिता के लिए डॉ.अर्जुन पांडेय, कुमकुम चतुर्वेदी, प्रमोद श्रीवास्तव, रश्मि सिंह, डॉ. मंजू शुक्ला, डॉ. रंजना डीन को सम्मानित किया गया। साहित्यिक सम्मान कार्यक्रम का समन्वय चित्रा वेंकटरमणन, पूजा श्रीवास्तव और शिखा श्रीवास्तव ने किया।
LCWW फाउंडेशन के प्रमुख सदस्यों में अनिल शुक्ला, प्रो. (डॉ.) शोभा बाजपेई, डॉ. राजीव सक्सेना, कैलाश कुमार श्रीवास्तव, नीरजा शुक्ला, विनोद श्रीवास्तव, अनिल शुक्ला (जूनियर),विभा शुक्ला, चित्रा वेंकटरमणन, पूजा श्रीवास्तव, डॉ. मनिंदर कौर, रश्मि सिंह और श्वेता श्रीवास्तव सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे।
आयोजकों के अनुसार, ‘उत्कर्ष: स्वाद से सम्मान तक’ का उद्देश्य केवल एक पाक प्रतियोगिता आयोजित करना नहीं था, बल्कि भोजन से जुड़ी पारिवारिक स्मृतियों, सामाजिक जुड़ाव और साहित्यिक रचनात्मकता को एक साझा मंच प्रदान करना था। ‘रसोई से यादों तक’ ने पारंपरिक और भूले-बिसरे व्यंजनों को सामने लाने के साथ उन स्वादों से जुड़ी स्मृतियों को भी साझा करने का अवसर दिया, जबकि साहित्यिक सम्मान ने LCWW की साहित्यिक गतिविधियों में सक्रिय योगदान देने वालों के प्रति संस्था की कृतज्ञता व्यक्त की।


