डेस्क: शाहदरा साइबर पुलिस स्टेशन ने निजी बैंकों और वित्तीय संस्थानों के डायरेक्ट सेलिंग एजेंट (DSA) बनकर लोगों से धोखाधड़ी करने वाले एक गैंग का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने बताया कि 15 लाख रुपए के लोन/ओवरड्राफ्ट फ्रॉड के मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है और 6.95 लाख रुपए बरामद किए गए हैं। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अदीब खान (36) (कथित तौर पर गैंग का मास्टरमाइंड है) और अनीश अली के तौर पर हुई है। अनीश अली ने कथित तौर पर ‘म्यूल’ बैंक अकाउंट (धोखाधड़ी के लिए इस्तेमाल होने वाला अकाउंट) उपलब्ध कराया और कैश निकालने में मदद की। पुलिस के मुताबिक उनका साथी राजेंद्र फरार है।
पुलिस के अनुसार यह मामला तब सामने आया जब ओवरड्राफ्ट/लोन सुविधा चाहने वाले शिकायतकर्ता अक्षय वर्मा की मुलाकात अदीब खान से हुई। खान ने कथित तौर पर बजाज फिनसर्व और अन्य निजी बैंकों का DSA बनकर कम ब्याज दर पर लोन सुविधा दिलाने का ऑफर दिया। पुलिस ने बताया कि शिकायतकर्ता का भरोसा जीतने के बाद खान ने उसे डिलीवरी सर्विस के जरिए कौशांबी के KM ट्रेड टावर्स स्थित एक पते पर तीन चेक भेजने के लिए कहा, जिनमें 15 लाख रुपए का एक खाली साइन किया हुआ चेक भी शामिल था। शिकायतकर्ता कथित तौर पर आरोपी से कभी व्यक्तिगत रूप से नहीं मिला।
15 लाख रुपए के चेक का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल किया गया और यह रकम केनरा बैंक के एक ‘म्यूल’ अकाउंट में जमा कर दी गई। पुलिस ने बताया कि बाद में दो चेक के जरिए यह पैसा निकाल लिया गया, जिससे धोखाधड़ी हुई। शिकायत मिलने के बाद साइबर पुलिस टीम ने ‘म्यूल’ अकाउंट, मोबाइल नंबरों, IMEI/IMSI डिटेल्स, CDR, IPDR, WhatsApp चैट और ट्रांजैक्शन व निकासी के रास्ते (ट्रेल) का तकनीकी और वित्तीय विश्लेषण किया। पुलिस ने बताया कि जांच के दौरान आरोपियों की पहचान और लोकेशन का पता चला जिसके बाद 25 सितंबर को अदीब खान और अनीश अली को गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस के अनुसार आरोपियों के पास से कुल 6.95 लाख रुपए नकद बरामद किए गए जिसमें 500 रुपए के 1,390 नोट शामिल थे। पुलिस ने बताया कि धोखाधड़ी से हासिल की गई रकम को आरोपियों के बीच बांटा गया था; इसमें अदीब खान को 9 लाख रुपए, अनीश अली को 3 लाख रुपए और फरार आरोपी राजेंद्र को 3 लाख रुपए मिले। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि खान पहले कई प्राइवेट बैंकों के लिए DSA के तौर पर काम कर चुका था और बजाज फिनसर्व के साथ कमीशन पर थर्ड-पार्टी DSA के तौर पर काम कर रहा था।
अपने अनुभव और प्रोफेशनल संपर्कों का फायदा उठाते हुए खान ने लोन या ओवरड्राफ्ट सुविधा चाहने वाले लोगों की पहचान की और उनसे WhatsApp के जरिए संपर्क किया। उसने खुद को एक असली DSA बताकर आकर्षक ब्याज दरों पर फाइनेंशियल सुविधाएं देने का ऑफर दिया। पुलिस के मुताबिक पीड़ितों का भरोसा जीतने के बाद उसने लोन या OD सुविधा प्रोसेस करने के बहाने उनसे चेक और डॉक्यूमेंट्स लिए और बाद में उनका गलत इस्तेमाल किया।
फरार आरोपी को पकड़ने, बाकी रकम बरामद करने, पैसों के पूरे लेन-देन का पता लगाने, दूसरे ‘म्यूल अकाउंट्स’ और साथियों की पहचान करने और यह पता लगाने के लिए आगे की जांच चल रही है कि क्या इसी तरीके का इस्तेमाल करके और लोगों के साथ भी धोखाधड़ी की गई थी।


