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Jitiya Vrat 2026: जितिया व्रत 3 को या 4 अक्टूबर को, जानें सही तारीख और शुभ मुहूर्त

डेस्क : जितिया व्रत 2026 कब है? जितिया यानी जीवित्पुत्रिका व्रत माताओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यह व्रत आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, महिलाएं अपनी संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन की कामना से यह व्रत करती हैं। कई क्षेत्रों में इसे जिउतिया व्रत के नाम से भी जाना जाता है। इस साल जितिया व्रत की तारीख को लेकर काफी कंफ्यूजन है। कुछ लोग 3 अक्टूबर तो कुछ 4 अक्टूबर को व्रत रखने की बात कर रहे हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि 2026 में जितिया व्रत किस दिन रखा जाएगा और पारण कब होगा।

3 अक्टूबर को रखा जाएगा जितिया व्रत
Drik Panchang के अनुसार, आश्विन कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 3 अक्टूबर 2026 को सुबह 7:59 बजे शुरू होगी और 4 अक्टूबर को सुबह 5:51 बजे समाप्त होगी। उदयातिथि के आधार पर जितिया व्रत 3 अक्टूबर, शनिवार को रखा जाएगा। वहीं, व्रत का पारण 4 अक्टूबर, रविवार को सुबह 7:28 बजे के बाद किया जाएगा। अलग-अलग स्थानों पर सूर्योदय और पंचांग गणना के अनुसार समय में थोड़ा अंतर हो सकता है।

जितिया व्रत के शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:38 से 5:26 बजे तक
प्रातः संध्या: सुबह 5:02 से 6:15 बजे तक
अभिजित मुहूर्त: सुबह 11:46 से दोपहर 12:34 बजे तक
गोधूलि मुहूर्त: शाम 6:05 से 6:29 बजे तक
सायाह्न संध्या: शाम 6:05 से 7:18 बजे तक

पितृ पक्ष में पड़ता है जितिया व्रत
जितिया व्रत की एक खास बात यह है कि यह पितृ पक्ष के दौरान पड़ता है। धार्मिक परंपरा में पितृ पक्ष को पूर्वजों के स्मरण और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का समय माना जाता है। जितिया से जुड़े नियम और पूजा की विधि अलग-अलग क्षेत्रों में कुछ अलग हो सकती है।

तीन दिनों तक चलती है जितिया की परंपरा
जितिया व्रत की तैयारी आमतौर पर एक दिन पहले से शुरू हो जाती है। इसे तीन दिनों की परंपरा से जोड़ा जाता है।
पहला दिन- नहाय-खाय: व्रत से एक दिन पहले महिलाएं स्नान करके सात्विक भोजन ग्रहण करती हैं। कई क्षेत्रों में इस दिन विशेष भोजन करने की परंपरा है।
दूसरा दिन- निर्जला उपवास: अष्टमी तिथि के दिन महिलाएं व्रत का संकल्प लेकर उपवास करती हैं। कई परंपराओं में यह व्रत निर्जला रखा जाता है और व्रती महिलाएं जल तक ग्रहण नहीं करतीं। पूजा-अर्चना के साथ जितिया व्रत की कथा सुनने की भी परंपरा है।
निर्जला व्रत कठिन हो सकता है। स्वास्थ्य संबंधी समस्या होने पर बिना पानी के उपवास करने के बजाय अपनी सेहत को प्राथमिकता देना जरूरी है। आवश्यकता होने पर जल या फलाहार लेने के बारे में परिवार की परंपरा और चिकित्सकीय सलाह को ध्यान में रखा जा सकता है।
तीसरा दिन- पारण: नवमी तिथि में व्रत का पारण किया जाता है। धार्मिक परंपरा के अनुसार पूजा और भोग के बाद व्रती महिलाएं भोजन या फलाहार ग्रहण करके व्रत पूरा करती हैं।

जितिया व्रत में कथा सुनने की परंपरा
जीवित्पुत्रिका व्रत में राजा जिमूतवाहन से जुड़ी कथा सुनने की विशेष परंपरा है। धार्मिक कथा में जिमूतवाहन के त्याग, करुणा और परोपकार का वर्णन मिलता है। कई स्थानों पर महिलाएं सामूहिक रूप से एकत्र होकर कथा सुनती हैं और पूजा करती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जितिया व्रत संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन की कामना से रखा जाता है। साथ ही परिवार की सुख-शांति और संतान के उज्ज्वल भविष्य की कामना भी की जाती है। यह व्रत केवल पुत्र के लिए ही नहीं, बल्कि पुत्र और पुत्री दोनों के स्वास्थ्य, लंबी आयु और सुखी जीवन की कामना से रखा जा सकता है। अलग-अलग क्षेत्रों में इसकी परंपराओं और मान्यताओं में अंतर देखने को मिलता है।

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