डेस्क: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) के सामने नंदीग्राम (Nandigram) और रेजीनगर (Rejinagar) विधानसभा सीटों के उपचुनाव को लेकर मुश्किलें बढ़ती दिखाई दे रही हैं। खबरों के मुताबिक, ममता बनर्जी ने कांग्रेस (Congress) से दोनों सीटों पर उपचुनाव के लिए समर्थन मांगा था। उन्होंने नंदीग्राम सीट कांग्रेस के लिए छोड़ने और रेजीनगर में तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress) के उम्मीदवार को समर्थन देने की पेशकश की थी। हालांकि, कांग्रेस की ओर से इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किए जाने की बात सामने आई है। दोनों दलों की तरफ से इस घटनाक्रम को लेकर अभी आधिकारिक बयान नहीं आया है।
रिपोर्ट के अनुसार, ममता बनर्जी ने सोमवार शाम कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल से बातचीत की थी। इस दौरान उन्होंने साथ मिलकर उपचुनाव लड़ने का प्रस्ताव रखा। बताया गया है कि ममता ने नंदीग्राम सीट पर कांग्रेस के साथ चुनाव लड़ने की बात कही और रेजीनगर में तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार के लिए कांग्रेस से समर्थन मांगा।
इसके साथ ही नंदीग्राम सीट पर अपने उम्मीदवार का नाम वापस लेने की पेशकश किए जाने की बात भी सामने आई है। हालांकि कांग्रेस ने इस प्रस्ताव को कथित तौर पर स्वीकार नहीं किया। इस घटनाक्रम से संकेत मिल रहे हैं कि तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस के बीच उपचुनाव को लेकर किसी तरह के तालमेल की कोशिश हुई थी, लेकिन यह कोशिश फिलहाल आगे नहीं बढ़ सकी है।
कांग्रेस की ओर से प्रस्ताव को अस्वीकार किए जाने के पीछे तृणमूल कांग्रेस के शासन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ कथित तौर पर हुए अत्याचारों को वजह बताया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शुभांकर सरकार ने कहा है कि यदि टीएमसी गठबंधन चाहती है, तो उसे नंदीग्राम और रेजीनगर दोनों सीटों पर कांग्रेस का साथ देना होगा।
इस बीच तृणमूल कांग्रेस ने दोनों सीटों पर अपने उम्मीदवार पहले ही घोषित कर दिए हैं। नंदीग्राम से संचिता प्रधान डे को टिकट दिया गया है, जबकि रेजीनगर से रबीउल आलम चौधरी को उम्मीदवार बनाया गया है। नंदीग्राम में संचिता प्रधान डे की उम्मीदवारी को लेकर स्थानीय स्तर पर नाराजगी की खबरें भी सामने आई हैं। उनके नाम को साल 2014 के शिक्षक भर्ती घोटाले से जोड़े जाने की बात कही जा रही है।
दूसरी ओर कांग्रेस भी दोनों सीटों पर चुनाव लड़ रही है। रेजीनगर से मोहम्मद अब्दुल्लाहिल कफी को उम्मीदवार बनाया गया है, जबकि नंदीग्राम से मिलन प्रधान कांग्रेस के प्रत्याशी हैं। दोनों सीटों पर 6 अक्टूबर को मतदान होगा और 9 अक्टूबर को मतगणना कराई जाएगी। इन सीटों पर उपचुनाव मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के सीट छोड़ने के कारण हो रहे हैं।
ममता बनर्जी की मुश्किलें इसलिए भी बढ़ सकती हैं क्योंकि ऋताब्रत बनर्जी की अगुवाई वाले टीएमसी के बागी गुट ने भी दोनों सीटों पर उम्मीदवार उतार दिए हैं। यह गुट तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न पर दावा कर रहा है। नंदीग्राम से मोहम्मद एतेशामुल हक और रेजीनगर से सफीउज्जमां शेख को मैदान में उतारने की बात कही गई है।
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में हो रहा है, जब तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर भारत निर्वाचन आयोग के स्तर पर फैसला होना बाकी है। रिपोर्ट के अनुसार, आयोग 17 सितंबर से पहले इस मामले में निर्णय ले सकता है। मई में हुए विधानसभा चुनाव में अविभाजित टीएमसी ने 80 सीटें जीती थीं। बाद में 60 से अधिक विधायक ऋताब्रत बनर्जी के नेतृत्व में अलग हो गए थे। ऐसे में उपचुनाव के नतीजे और पार्टी के नाम-चिह्न को लेकर होने वाला फैसला टीएमसी के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

