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भारत ने जब्त किया पाकिस्तान का 3,62,000 किलो खजूर, पहचान छिपाकर UAE के रास्ते पहुंचा था महाराष्ट्र

डेस्क: राजस्व खुफिया निदेशालय ने पाकिस्तान से आयात पर लगाए गए प्रतिबंध के बावजूद माल भेजने की कोशिशों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है। इस कार्रवाई के तहत, राजस्व खुफिया निदेशालय ने पाकिस्तान का 362 मीट्रिक टन यानी 3,62,000 किलो से ज्यादा सूखा खजूर जब्त किया है। भारत सरकार के वित्त मंत्रालय ने सोमवार को इसकी जानकारी दी है।

राजस्व खुफिया निदेशालय के अधिकारियों ने खुफिया जानकारी के आधार पर महाराष्ट्र के नासिक के सीएफएस अंबड में सूखे खजूर के 13 कंटेनर जब्त किए, जिन्हें मुंबई स्थित एक फर्म द्वारा आयात किया गया था। ये खेप संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के जेबेल अली से आई थीं और आयात दस्तावेजों में संयुक्त अरब अमीरात को मूल देश घोषित किया गया था।

प्रारंभिक जांच से पता चलता है कि खजूर के पाकिस्तान मूल को छिपाने के लिए सावधानीपूर्वक बनाई गई ट्रांसशिपमेंट व्यवस्था की गई थी। सूखे खजूर को शुरू में पाकिस्तान के कराची बंदरगाह से संयुक्त अरब अमीरात के जेबेल अली बंदरगाह तक एक जहाज पर कंटेनरों के एक सेट में भेजा गया था। जेबेल अली में माल को केवल ट्रांसशिप किया गया था और कंटेनरों के दूसरे सेट में स्थानांतरित किया गया था और पाकिस्तानी नागरिकों द्वारा चलाई जाने वाली संस्थाओं के माध्यम से भारत में आगे शिपमेंट के लिए एक अलग जहाज पर लोड किया गया था।

बताते चलें कि भारत सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में पहलगाम आतंकी हमले के बाद डीजीएफटी अधिसूचना संख्या 06/2025-26 दिनांक 2 मई 2025 के माध्यम से, 2 मई 2025 से पाकिस्तान से उत्पन्न या निर्यात किए गए सभी वस्तुओं के प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष आयात या पारगमन पर पूर्ण प्रतिबंध लगा रखा है। इसके जवाब में, राजस्व खुफिया निदेशालय ने “ऑपरेशन डीप मैनिफेस्ट” के तहत, तीसरे देशों के माध्यम से भारत में आयात करने की कोशिश में पाकिस्तान से आने वाले वस्तुओं की लगातार पहचान, अवरोधन और जब्ती की है।
इस बरामदगी से राजस्व खुफिया निदेशालय के उस मजबूत इरादों का पता चलता है जिसके अंतर्गत वो व्यापार प्रतिबंधों को गलत घोषणा, वस्तु की अदला-बदली और दस्तावेजों में हेरफेर के माध्यम से दरकिनार करने की कोशिश करने वाले परिष्कृत नेटवर्क की पहचान करने, उन्हें बाधित करने और नष्ट करने के लिए प्रतिबद्ध है, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा हो सके और सप्लाई चेन की अखंडता को मजबूत किया जा सके।

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