डेस्क: राजस्थान के कोटा जिले में नगर निगम चुनाव के सरगर्मियों के बीच मतदाता सूची की एक ऐसी गंभीर लापरवाही सामने आई है, जिसने पूरे प्रशासनिक और चुनावी सत्यापन तंत्र पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. शहर के वार्ड संख्या 29 की वोटर लिस्ट में एक मतदाता के नाम के आगे उसकी खुद की तस्वीर होने के बजाय भगवान हनुमान जी महाराज की फोटो छपी हुई मिली है. यह अजीबो-गरीब मामला सामने आते ही चुनावी गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं, वहीं चुनाव लड़ रहे प्रत्याशी और प्रशासनिक अधिकारी भी सकते में हैं.
मामला वार्ड संख्या 29 के भाग संख्या 12 का है. मतदाता सूची में क्रमांक 1294 पर 35 वर्षीय जगदीश (पिता का नाम: रामचंद्र) का नाम दर्ज है. उनका पता ‘प्रेम नगर सेकंड, कंसुआ क्षेत्र, मकान नंबर 6’ दर्शाया गया है. सूची में नाम, पता और पिता का नाम तो सही तरीके से दर्ज है, लेकिन फोटो वाले कॉलम में संबंधित व्यक्ति के चेहरे के स्थान पर भगवान हनुमान जी की तस्वीर लगा दी गई है.
यह मामला तब उजागर हुआ जब चुनाव प्रचार और सत्यापन के सिलसिले में बीएलओ (BLO) क्षेत्र में पहुंचे. संबंधित बीएलओ पिछले 10 दिनों से मकान नंबर 6 में जाकर जगदीश नामक इस मतदाता की तलाश कर रहे हैं, लेकिन अब तक उनका कोई अता-पता नहीं चला है. वोटर लिस्ट में संबंधित व्यक्ति का कोई मोबाइल नंबर भी दर्ज नहीं है, जिससे उनसे संपर्क साधा जा सके. ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि जब मतदाता का कोई अता-पता नहीं है, तो उसका भौतिक सत्यापन किस स्तर पर और कैसे पूरा हुआ?
मामले पर सफाई देते हुए क्षेत्र के बीएलओ राजेश गुप्ता ने बताया कि उन्होंने इस नाम का सत्यापन नहीं किया है और न ही उन्होंने यह फॉर्म जमा किया था. उनके अनुसार, यह नाम एसआईआर (SIR) के जरिए या सीधे कार्यालय स्तर से ऑफलाइन आवेदनों के माध्यम से जोड़ा गया है. बीएलओ ने बताया कि उन्होंने संबंधित व्यक्ति को खोजने की पूरी कोशिश की, लेकिन विफलता मिलने के बाद पूरे मामले की रिपोर्ट रिटर्निंग ऑफिसर (RO) को सौंप दी गई है.
वार्ड- 29 से भाजपा प्रत्याशी बद्री आर्य ने बताया कि जनसंपर्क के दौरान कार्यकर्ताओं ने उन्हें मतदाता सूची की इस गड़बड़ी के बारे में जानकारी दी. उन्होंने संभावना जताई कि हो सकता है कि जगदीश एक वास्तविक मतदाता हों और ऑनलाइन-ऑफलाइन डेटा एंट्री के दौरान गलती से गलत फोटो अपलोड हो गई हो.
बीएलओ राजेश गुप्ता ने बताया कि कोटा में मतदाता सूची में इस तरह की गलती पहली बार नहीं हुई है. इससे पहले वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव के दौरान भी एक मतदाता के फोटो वाले कॉलम में अलमारी की तस्वीर छप गई थी, जिसे बाद में तकनीकी त्रुटि मानकर सुधारा गया था. फिलहाल, अधिकारी इस बात की जांच कर रहे हैं कि यह महज एक मानवीय भूल है या इसके पीछे कोई फर्जीवाड़ा करने की कोशिश की गई है.

