डेस्क: “अभी न जाओ छोड़कर कि दिल अभी भरा नहीं…” आशा भोसले (Asha Bhosle)और मोहम्मद रफी (Mohammed Rafi)का यह गीत 65 साल बाद भी उनकी यादों से जुड़ा हुआ है। आज आशा भोसले की 93वीं जयंती (Birth Anniversary) है। यह पहला जन्मदिन है, जब वह हमारे बीच मौजूद नहीं हैं। 12 अप्रैल 2026 को अपने जन्मदिन से करीब पांच महीने पहले उनका निधन (Death) हो गया था। अपने लंबे सिनेमाई सफर में उन्होंने हजारों गीतों को अपनी आवाज दी, जिन्हें आज भी पसंद किया जाता है। हालांकि, उनकी पहचान सिर्फ गायकी (Singing) तक सीमित नहीं थी। उन्हें खाना बनाने (Cooking) का भी बेहद शौक था और वह इस कला में काफी निपुण थीं।
आशा भोसले ने महज 10 साल की उम्र में गाना शुरू कर दिया था। उनके पिता दीनानाथ मंगेशकर थिएटर अभिनेता और शास्त्रीय गायक थे। इसी वजह से उनका बचपन संगीत के माहौल में बीता। जब आशा केवल 9 साल की थीं, तभी उनके पिता का अचानक निधन हो गया। इसके बाद परिवार आर्थिक संकट में आ गया। जीवनयापन के लिए परिवार को पुणे और कोल्हापुर से होते हुए मुंबई आना पड़ा। कम उम्र में ही परिवार की जिम्मेदारी संभालने के लिए बड़ी बहन लता मंगेशकर और आशा ने गायकी की दुनिया में कदम रखा।
बचपन में आशा अपनी बड़ी बहन लता मंगेशकर के बेहद करीब थीं और अक्सर उनके पीछे-पीछे रहती थीं। लता भी छोटी बहन को अपनी गोद में लेकर घूमती थीं। एक बार लता उन्हें स्कूल ले गईं तो शिक्षक ने इसका विरोध किया था। आगे चलकर आशा ने मराठी फिल्म ‘मझा बल’ के लिए ‘चला चला नव बाला’ गीत गाया। वर्ष 1943 में रिकॉर्ड किए गए इस गीत के समय उनकी उम्र केवल 10 साल थी। बाद में उन्होंने हिंदी समेत कई भाषाओं में हजारों गीत गाए और लोकगीत, गजल, शास्त्रीय संगीत, कव्वाली तथा बॉलीवुड गीतों में अपनी आवाज दी।
करियर के शुरुआती दौर में आशा को काफी संघर्ष करना पड़ा। उस समय गीता दत्त, शमशाद बेगम और लता मंगेशकर की काफी मांग थी। जब ये गायिकाएं किसी गीत को छोड़ देती थीं, तो वह आशा को मिल जाता था। 1950 के दशक में उन्होंने वैम्प्स, बैड गर्ल्स और सेकंड ग्रेड फिल्मों के कई गीत गाए। इसी दौर में यह अफवाह भी फैली कि वह लता दीदी को अपनी प्रतिद्वंद्वी मानने लगी थीं।
एक इंटरव्यू में आशा ने रिकॉर्डिंग से जुड़ा एक किस्सा बताया था। संगीतकार शंकर जयकिशन ने दोनों बहनों को फिल्म ‘बसंत बहार’ का ‘कर गया रे कर गया रे मुझपे जादू’ गीत दिया था। यह राग भैरवी पर आधारित था और दोनों ने इसकी कई बार रिहर्सल की थी। रिकॉर्डिंग वाले दिन आशा स्टूडियो जाने के लिए तैयार थीं, जबकि लता अभी रियाज कर रही थीं। आशा को उसी दिन एक और गीत भी रिकॉर्ड करना था। करीब एक घंटे तक इंतजार करने के बाद वह रिहर्सल रूम में गईं और लता से कहा, “अब चलिए, मैं और इंतजार नहीं कर सकती।” लता ने मुस्कुराकर जवाब दिया और उनके साथ रिकॉर्डिंग के लिए चली गईं।
आशा की निजी जिंदगी में भी कई उतार-चढ़ाव आए। 16 साल की उम्र में उन्हें लता मंगेशकर के 31 वर्षीय निजी सचिव गणपत राव भोसले से प्यार हुआ और परिवार की इच्छा के खिलाफ उन्होंने उनसे शादी कर ली। इसके बाद उन्हें घर छोड़ना पड़ा। शुरुआती दिनों के बाद उनके साथ मारपीट होने लगी और उन्हें परिवार के सदस्यों से मिलने से भी रोका गया। 1960 में वह दो बच्चों के साथ मां के घर लौट आईं। उस समय वह गर्भवती भी थीं। वापस आने पर लता ने उन्हें अपने पास कमरा दिया और परिवार फिर एक साथ हुआ।
इसके बाद आशा ने दोबारा गायकी शुरू की और राहुल देव बर्मन यानी आरडी बर्मन से उनकी मुलाकात हुई। दोनों ने कई गीत साथ किए और वर्ष 1980 में शादी की। आरडी बर्मन उनसे छह साल छोटे थे और दोनों की पहले की शादियां टूट चुकी थीं। 4 जनवरी 1994 को 54 वर्ष की उम्र में कार्डियक अरेस्ट से पंचम दा का निधन हो गया।
गायकी के अलावा आशा का दूसरा विकल्प कुकिंग था। वह खाना बनाने की शौकीन थीं। उनके घर की दावतों में पाया करी, फिश करी, कढ़ाई गोश्त और दाल परोसी जाती थी। उनका कढ़ाई गोश्त और बिरयानी बेहद पसंद किया जाता था। उन्होंने कहा था कि अगर वह गायिका नहीं होतीं तो अच्छी कुक बनकर पैसे कमातीं। उन्होंने विदेश में अपनी रेस्तरां चेन भी खोली थी। दुबई और कुवैत में उनके नाम से रेस्तरां लोकप्रिय रहे। ऋषि कपूर को भी उनके हाथ का शामी कबाब, कढ़ाई गोश्त और काली दाल पसंद थी।
आशा भोसले के बड़े बेटे हेमंत अब इस दुनिया में नहीं हैं। उनकी बेटी वर्षा ने 8 अक्टूबर 2012 को आत्महत्या कर ली थी, जबकि उनके सबसे छोटे बेटे आनंद भोसले हैं। 12 अप्रैल 2026 को 92 वर्ष की उम्र में आशा का निधन हुआ। उनका आखिरी गीत गोरिल्लाज के साथ ‘द शैडोई लाइट’ था, जो 27 फरवरी 2026 को रिलीज हुआ था। यह गीत गोरिल्लाज के एल्बम के लिए रिकॉर्ड किया गया था।

