रुपये को बचाने के लिए RBI ने झोंके ₹71,000 करोड़!
लेकिन सवाल है,आखिर RBI को इतने अरबों डॉलर बेचने की जरूरत क्यों पड़ी?

पिछले हफ्ते Reserve Bank of India ने विदेशी मुद्रा बाजार में कम-से-कम 8 अरब डॉलर बेचे, यानी करीब ₹71,000 करोड़। कुछ bankers का अनुमान है कि यह intervention 15 अरब डॉलर तक हो सकता है।
इसका मकसद था,रुपये को कमजोर होने से रोकना और उसकी volatility को control करना।
इस intervention का असर भी दिखा।
3 सितंबर को रुपया 94.2850 प्रति डॉलर तक पहुंच गया, जो करीब दो महीने का मजबूत स्तर था।
लेकिन RBI के पास इतने डॉलर आए कहां से?
हाल ही में भारत में $136.38 billion से ज्यादा के foreign-currency inflows आए हैं। इसमें FCNR(B) deposits, overseas foreign-currency borrowings और external commercial borrowings शामिल हैं।
और भारत के forex reserves भी $740.8 billion के record level तक पहुंच चुके हैं।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती…
भारत करीब 85% crude oil अपनी जरूरत का import करता है, और Middle East tensions के कारण Brent crude करीब $97 प्रति barrel के आसपास है। महंगा तेल रुपये पर फिर से pressure डाल सकता है।
यानी RBI के सामने एक बड़ा balancing act है—
रुपये को भी संभालना है,
महंगे तेल के असर को भी झेलना है,
और forex reserves को भी समझदारी से manage करना है।
तो अगली बार जब आप सुनें कि “रुपया डॉलर के मुकाबले गिर रहा है”, याद रखिएउसके पीछे सिर्फ डॉलर नहीं, बल्कि oil prices, foreign investment और RBI की intervention strategy भी काम करती है।

