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जम्मू-कश्मीर में धमकियों पर फारूक का बड़ा बयान बोले राज्य का दर्जा रोकने की साजिश

डेस्क: जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir)में कश्मीरी पंडितों (Kashmiri Pandits)को कथित तौर पर मिल रही धमकियों को लेकर राजनीतिक विवाद (Political controversy)तेज हो गया है। नेशनल कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने इन धमकियों को लेकर उपराज्यपाल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि घाटी में कश्मीरी पंडितों को डराने का काम कराया जा रहा है ताकि जम्मू-कश्मीर को दोबारा राज्य का दर्जा देने की प्रक्रिया को टाला जा सके। उनके इस बयान के बाद भाजपा और कश्मीरी पंडित समुदाय की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है।
अनंतनाग में पत्रकारों से बातचीत के दौरान फारूक अब्दुल्ला ने कश्मीरी पंडितों को मिल रही धमकियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि घाटी में अब कश्मीरी पंडितों की संख्या बेहद कम है। उन्होंने तर्क दिया कि जम्मू-कश्मीर में कई बड़े प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी हिंदू समुदाय से हैं। ऐसे में अगर हिंदुओं को निशाना बनाकर धमकियां दी जा रही हैं तो इन वरिष्ठ अधिकारियों को इस तरह की धमकियां क्यों नहीं मिल रही हैं। इसी सवाल के आधार पर उन्होंने मौजूदा प्रशासन की भूमिका पर संदेह जताया।
फारूक अब्दुल्ला ने आरोप लगाया कि इन धमकियों के पीछे उपराज्यपाल प्रशासन का हाथ हो सकता है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी उपराज्यपाल प्रशासन के पास है इसलिए उसे यह बताना चाहिए कि धमकियां कहां से आ रही हैं और इनके पीछे कौन लोग हैं। हालांकि इन आरोपों के समर्थन में उन्होंने कोई सार्वजनिक सबूत पेश नहीं किया। उनका बयान फिलहाल राजनीतिक आरोप के तौर पर सामने आया है।
फारूक अब्दुल्ला ने इस पूरे विवाद को जम्मू-कश्मीर के राज्य के दर्जे से भी जोड़ दिया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से राज्य का दर्जा बहाल करने को लेकर पहले जो आश्वासन दिए गए थे उन्हें पूरा नहीं किया गया है। उनके मुताबिक पहले परिसीमन होगा फिर विधानसभा चुनाव होंगे और उसके बाद राज्य का दर्जा बहाल करने की बात कही गई थी। लेकिन उनका आरोप है कि इस दिशा में अपेक्षित कदम नहीं उठाए गए।
उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ हुई मुलाकात का भी जिक्र किया। फारूक के मुताबिक उनके सांसदों को भरोसा दिया गया था कि राज्य के दर्जे से जुड़ा फैसला जल्द लिया जाएगा। उन्होंने सवाल उठाया कि उस आश्वासन के बाद काफी समय बीत चुका है लेकिन अब तक स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं हुई है। इसी मुद्दे को लेकर नेशनल कॉन्फ्रेंस की ओर से केंद्र सरकार पर दबाव बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।
फारूक अब्दुल्ला ने अनुच्छेद 370 और 35ए के मुद्दे पर भी अपने राजनीतिक विरोधियों को निशाने पर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन लोगों ने पहले भाजपा के साथ मिलकर इन प्रावधानों को हटाने में मदद की थी वही अब राज्य के दर्जे और अनुच्छेद 370 की बहाली की बात कर रहे हैं। उन्होंने इसे जनता को भ्रमित करने की कोशिश बताया।

वहीं भाजपा ने फारूक अब्दुल्ला के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। पार्टी प्रवक्ता अंकुर शर्मा ने उनके बयान को चौंकाने वाला बताते हुए आरोप लगाया कि वह कश्मीरी पंडितों के नरसंहार और उनके दर्द को नकारने की कोशिश कर रहे हैं। भाजपा का कहना है कि कश्मीरी पंडितों से जुड़े मुद्दे को राजनीतिक साजिश के रूप में पेश करने के बजाय उनकी सुरक्षा और सम्मान पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
इस पूरे घटनाक्रम ने जम्मू-कश्मीर में एक बार फिर कश्मीरी पंडितों की सुरक्षा और राज्य के दर्जे के सवाल को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। एक ओर फारूक अब्दुल्ला प्रशासन पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं तो दूसरी ओर भाजपा उनके बयान को कश्मीरी पंडित समुदाय के प्रति असंवेदनशील बता रही है। अब इस विवाद में प्रशासन की ओर से आने वाली प्रतिक्रिया पर सभी की नजरें टिकी हैं।

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