डेस्क: मुजफ्फरपुर। बीआरए बिहार विश्वविद्यालय (बीआरएबीयू) में स्नातक सत्र 2026-30 की नामांकन प्रक्रिया में गंभीर फर्जीवाड़ा और प्रशासनिक लापरवाही उजागर हुई है. विश्वविद्यालय के ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन भरते समय दर्जनों छात्र-छात्राओं ने 12वीं के अंकों में हेरफेर कर 100 से 150 अंक तक बढ़ाकर दर्ज कर दिए.
इसका सीधा अनुचित लाभ लेते हुए उन्होंने पहली और दूसरी मेधा सूची में अपना स्थान सुरक्षित कर लिया. दूसरी ओर, कॉलेजों ने भी दिशा-निर्देशों की अनदेखी करते हुए बिना आवश्यक मूल दस्तावेज सत्यापन के ही इन विद्यार्थियों के दाखिले पक्के कर दिए. अब तक तीन दर्जन से अधिक गलत नामांकन के मामले पकड़ में आ चुके हैं. सबसे अधिक 20 मामले सीतामढ़ी के रामसेवक सिंह महिला महाविद्यालय से जुड़े हैं. इसके अलावा हाजीपुर, मुजफ्फरपुर, बेतिया और मोतिहारी के कॉलेजों में भी ऐसे फर्जीवाड़े सामने आए हैं.
पोर्टल पर ऑटो-वेरिफिकेशन नहीं होने का उठाया फायदा
दाखिला प्रक्रिया की खामियों और सत्यापन में घोर लापरवाही के प्रमुख पहलू इस प्रकार हैं:
मैनुअल एंट्री की खामी: पोर्टल पर अंक मैनुअली भरने का विकल्प था, जहां सत्यापन का कोई स्वचालित सिस्टम नहीं था. अपलोड अंकपत्र में कम अंक थे, जबकि फॉर्म में बढ़ाए गए अंक दर्ज किए गए.
सत्यापन में खानापूर्ति: विश्वविद्यालय के स्पष्ट आदेश के बावजूद अंगीभूत एवं संबद्ध कॉलेजों ने दाखिले के समय दस्तावेजों का मूल अंकपत्र से मिलान नहीं किया.
फर्जीवाड़े की बानगी: 315 अंक वाली छात्रा ने 415 अंक भरकर कॉलेज पा लिया. 270 अंक वाली द्वितीय श्रेणी छात्रा ने 400 अंक दिखाकर प्रतिष्ठा विषय में प्रवेश ले लिया. ग्रेस अंक से पास छात्र ने 455 अंक दिखाकर सीट कब्जा ली.
प्राचार्यों से मांगा जाएगा स्पष्टीकरण, रद्द होंगे दाखिले
विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले को बेहद गंभीरता से लिया है:
डीएसडब्ल्यू की चेतावनी: डीएसडब्ल्यू प्रो. आलोक प्रताप सिंह ने बताया कि बिना सत्यापन नामांकन लेने वाले कॉलेजों के प्राचार्यों से स्पष्टीकरण मांगा जा रहा है.
दाखिला रद्द: विश्वविद्यालय स्तर पर सभी संदेहास्पद दस्तावेजों की जांच की जा रही है और गलत जानकारी देने वाले विद्यार्थियों का नामांकन तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाएगा.

