डेस्क: नेपाल इन दिनों भीषण प्राकृतिक आपदा (Severe Natural Disaster in Nepal) से जूझ रहा है। रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी (Bhote Koshi River) की विनाशकारी बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। कई घरों और इमारतों के साथ पूरे के पूरे गांव प्रभावित हुए हैं। इस बीच एक जलविद्युत परियोजना की सुरंग में करीब 35 लोगों के फंसे होने की खबर से चिंता बढ़ गई है। उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने के लिए राहत और बचाव अभियान युद्धस्तर पर चलाया जा रहा है। नेपाल के गृहमंत्री सुधन गुरुङ खुद घटनास्थल पर मौजूद रहकर रेस्क्यू ऑपरेशन की निगरानी कर रहे हैं।
सुरंग के मुहाने पर जमा हुआ मलबा
बाढ़ के तेज बहाव के कारण जलविद्युत परियोजना की सुरंग के प्रवेश द्वार पर भारी मात्रा में मिट्टी और पत्थर जमा हो गए। इसी वजह से अंदर मौजूद कर्मचारी बाहर नहीं निकल सके। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, हाइड्रो इंजीनियर समेत करीब 35 लोग अब भी सुरंग के अंदर फंसे हुए हैं।
सुरंग का रास्ता खोलने के लिए मिनी एक्स्काभेटर समेत जरूरी मशीनरी और उपकरण मौके पर पहुंचाए गए हैं। बचाव दल मलबा हटाकर सुरंग का रास्ता खोलने की लगातार कोशिश कर रहा है।
सेना और सशस्त्र पुलिस ने संभाला मोर्चा
रेस्क्यू अभियान की कमान गृहमंत्री सुधन गुरुङ के नेतृत्व में संभाली गई है। नेपाली सेना और सशस्त्र पुलिस बल के जवान सुरंग के प्रवेश मार्ग को साफ करने के साथ अंदर फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।
अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती सुरंग के भीतर ऑक्सीजन की उपलब्धता को लेकर है। इसी खतरे को देखते हुए बचाव अभियान दिन के साथ-साथ पूरी रात भी जारी रखा गया।
दूसरी सुरंग से सैकड़ों लोगों को बचाया गया
बाढ़ के कारण नेपाल की कई जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों और अन्य संरचनाओं में लोगों के फंसने की घटनाएं सामने आई हैं। नेपाली सेना के मुताबिक, ऊपरी त्रिशूली क्षेत्र में एक अन्य सुरंग से सैकड़ों लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है। हालांकि, अभी भी कुछ लोगों के फंसे या लापता होने की आशंका के चलते तलाश और बचाव अभियान जारी है।
अंतरराष्ट्रीय मदद लेने को तैयार नेपाल सरकार
बढ़ती चुनौती के बीच नेपाल सरकार अब अंतरराष्ट्रीय सर्च-एंड-रेस्क्यू टीमों की मदद लेने के लिए भी तैयार हो गई है। बताया जा रहा है कि शुरुआत में सरकार ने विदेशी बचाव दलों की मदद लेने से इनकार किया था, लेकिन आपदा में कुछ विदेशी नागरिकों के लापता होने के बाद संबंधित देशों की ओर से राजनयिक दबाव बढ़ा।
इसके बाद सरकार ने अपना रुख बदलते हुए जरूरत पड़ने पर अंतरराष्ट्रीय बचाव टीमों की मदद लेने की तैयारी शुरू कर दी है। फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता सुरंग में फंसे 35 लोगों तक पहुंचना और उन्हें सुरक्षित बाहर निकालना है।

