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दुनिया के सबसे बड़े टेलिस्कोप का 70 फीसदी काम पूरा, पृथ्वी जैसे ग्रहों पर जीवन के संकेत तलाशेगा ईएलटी

डेस्क: ब्रह्मांड (Universe) के रहस्यों को समझने की इंसानी कोशिश अब एक और बड़े मुकाम पर पहुंच रही है। चिली के अटाकामा मरुस्थल (Chile’s Atacama Desert) में तैयार किए जा रहे दुनिया के सबसे बड़े टेलिस्कोप एक्सट्रीमली लार्ज टेलीस्कोप (ELT) का 70 फीसदी से अधिक निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। यूरोपियन सदर्न ऑब्जर्वेटरी (ESO) की इस महत्वाकांक्षी परियोजना के विशाल मुख्य ढांचे को हाल ही में पहली बार उसकी धुरी पर सफलतापूर्वक घुमाया गया।
वैज्ञानिकों के मुताबिक यह परीक्षण टेलिस्कोप के निर्माण में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। ईएलटी के 2030 के अंत तक ब्रह्मांड का अवलोकन शुरू करने की उम्मीद है।

35 लाख किलोग्राम के ढांचे की हुई पहली परीक्षा
ईएलटी का मुख्य ढांचा करीब 3,500 टन यानी 35 लाख किलोग्राम वजनी है। अंतरिक्ष में मौजूद किसी भी दिशा की वस्तु का अध्ययन करने के लिए इस विशाल ढांचे को बेहद सटीकता से घुमाना आवश्यक है। पहली बार इसकी धुरी पर घुमाकर इसी क्षमता की जांच की गई।
ईएलटी का मुख्य दर्पण करीब 39 मीटर यानी 128 फीट चौड़ा होगा। यह विशाल दर्पण दूर अंतरिक्ष से आने वाली बेहद कमजोर रोशनी को एकत्र करने का काम करेगा।
पृथ्वी जैसे ग्रहों पर नजर
ईएलटी की सबसे महत्वपूर्ण वैज्ञानिक उपलब्धियों में दूसरे तारों की परिक्रमा कर रहे पृथ्वी जैसे पथरीले ग्रहों का अध्ययन शामिल होगा। वैज्ञानिक ऐसे ग्रहों की सीधी तस्वीर हासिल करने की कोशिश करेंगे।
जब किसी बाहरी ग्रह के वातावरण से होकर उसके तारे की रोशनी गुजरेगी तो ईएलटी उस प्रकाश का बेहद सूक्ष्म विश्लेषण कर सकेगा। इससे वैज्ञानिकों को ग्रह के वातावरण में मौजूद गैसों की पहचान करने और यह समझने में मदद मिल सकती है कि वहां जीवन के अनुकूल परिस्थितियां मौजूद हैं या नहीं।
इंसानी आंख से करोड़ों गुना ज्यादा शक्तिशाली
ईएलटी की क्षमता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसे इंसानी आंख से करीब 10 करोड़ गुना ज्यादा शक्तिशाली बताया जा रहा है। इसकी तस्वीरें हबल स्पेस टेलीस्कोप की तुलना में करीब 16 गुना अधिक स्पष्ट होने की उम्मीद है।
हबल अंतरिक्ष में पृथ्वी से करीब 500 किलोमीटर की ऊंचाई पर रहकर ब्रह्मांड का अध्ययन करता है, जबकि ईएलटी को धरती पर चिली के सेरो आर्माजोन्स पर्वत पर करीब 3,046 मीटर की ऊंचाई पर स्थापित किया जा रहा है। अटाकामा का बेहद शुष्क और साफ वातावरण खगोलीय अवलोकन के लिए अनुकूल माना जाता है।
शुरुआती ब्रह्मांड के रहस्यों से उठेगा पर्दा
ईएलटी का उद्देश्य सिर्फ बाहरी ग्रहों की तलाश करना नहीं है। वैज्ञानिक इसके जरिए बिग बैंग के बाद बनीं शुरुआती आकाशगंगाओं का अध्ययन करने की कोशिश करेंगे। इससे यह समझने में मदद मिल सकती है कि शुरुआती ब्रह्मांड कैसा था और पहली आकाशगंगाओं का निर्माण किस तरह हुआ।
इसके अलावा टेलिस्कोप ब्रह्मांड के विस्तार की गति को मापने और डार्क मैटर तथा डार्क एनर्जी जैसे रहस्यमय विषयों को समझने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
क्या पहली बार पृथ्वी जैसी दुनिया की तस्वीर आएगी?
वर्तमान में वैज्ञानिक कई बाहरी ग्रहों का पता उनके तारों की रोशनी में होने वाले बदलाव के आधार पर लगाते हैं। ईएलटी इस अध्ययन को एक कदम आगे ले जाने की कोशिश करेगा। इसकी अत्याधुनिक क्षमता से दूसरे तारों की परिक्रमा कर रहे पथरीले ग्रहों की सीधी तस्वीर लेने और उनके वातावरण में मौजूद रासायनिक संकेतों का विश्लेषण करने की संभावना बढ़ेगी।
यदि इन ग्रहों के वातावरण में जीवन से जुड़े संभावित संकेत मिलते हैं, तो यह मानव इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण वैज्ञानिक खोजों में से एक हो सकती है। हालांकि किसी ग्रह पर जीवन की पुष्टि के लिए केवल वातावरण में किसी एक गैस की मौजूदगी पर्याप्त नहीं होगी और वैज्ञानिकों को कई स्वतंत्र प्रमाणों का अध्ययन करना होगा।

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