दरभंगा: कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने गीतम्, नाटकम्, स्तोत्र-पाठ, अभिनय सहित विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भारतीय संस्कृति एवं संस्कृत की समृद्ध परंपरा को जीवंत किया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों की प्रतिभा, रचनात्मकता और संस्कृत के प्रति उनकी अभिरुचि का सुंदर प्रदर्शन देखने को मिला।
सांस्कृतिक कार्यक्रम का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति, संस्कार और परंपराओं से जोड़ना भी है। गीत, नाटक और अभिनय के माध्यम से संस्कृत साहित्य में निहित जीवन-मूल्यों, सामाजिक संदेशों तथा नैतिक आदर्शों को सहज एवं प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जा सकता है। वहीं स्तोत्र-पाठ के माध्यम से आध्यात्मिक चेतना, अनुशासन एवं भारतीय वाङ्मय की भावभूमि से विद्यार्थियों का परिचय होता है।
संस्कृत विश्वविद्यालयों में इस प्रकार के कार्यक्रमों का विशेष महत्व है, क्योंकि यहां संस्कृत का अध्ययन केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित न रहकर व्यवहार, कला, अभिव्यक्ति और सांस्कृतिक चेतना से जुड़ता है। मंच पर संस्कृत में संवाद, अभिनय और गीत प्रस्तुत करने से विद्यार्थियों में भाषा के प्रति आत्मविश्वास बढ़ता है तथा संस्कृत को जीवंत और जनसुलभ बनाने में सहायता मिलती है।
कार्यक्रम में प्रस्तुत नाटकों और अभिनय के माध्यम से विद्यार्थियों ने विभिन्न सामाजिक एवं सांस्कृतिक संदेशों को प्रभावशाली ढंग से सामने रखा। गीतम् और स्तोत्र-पाठ ने वातावरण को भावपूर्ण एवं संस्कृतमय बना दिया। प्रस्तुतियों को देखकर उपस्थित लोगों ने विद्यार्थियों की प्रतिभा की सराहना की।
इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि संस्कृति किसी समाज की आत्मा होती है और संस्कृत भारतीय संस्कृति की महत्वपूर्ण संवाहिका है। विद्यार्थियों में छिपी कलात्मक प्रतिभा को मंच प्रदान करने वाले ऐसे आयोजन उनके सर्वांगीण व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इससे उनमें नेतृत्व क्षमता, सामूहिकता, आत्मविश्वास, अनुशासन तथा अपनी सांस्कृतिक विरासत के प्रति गौरव की भावना विकसित होती है।
अंततः यह सांस्कृतिक आयोजन संस्कृत भाषा, भारतीय संस्कृति और युवा प्रतिभा के सुंदर समन्वय का उदाहरण बना।

