अंतरराष्ट्रीय

‘नेपाल-तिब्बत आपदा’ – मौत और नुकसानों के आकड़ों पर चीन का झूठा रवैया

डेस्क : नेपाल-तिब्बत बॉर्डर पर आई भयानक बाढ़ ने इस आपदा की दो बहुत अलग-अलग तस्वीरें सामने आई हैं. एक ओर जहां नेपाल में पत्रकारों और बचे हुए लोगों ने तबाही के बारे में पूरी जानकारी देने की कोशिश की है, वहीं तिब्बत में जानकारी पर कड़ी पाबंदियों के कारण चीन की तरफ हुई तबाही का सही अंदाजा लगाना बहुत मुश्किल हो गया है.

बाढ़ ने गांवों को तबाह कर दिया है, घरों को बहा ले गई है और सैकड़ों लोगों की जान ले ली है. नेपाल पुलिस के मुताबिक, नेपाल में मरने वालों की आधिकारिक संख्या 616 है. वहीं चीन ने तिब्बत में सिर्फ 7 लोगों की मौत की सूचना दी. इस बड़े अंतर ने बॉर्डर के चीनी हिस्से से आ रही जानकारी और आंकड़े पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

 

सिर्फ 7 लोगों की मौत पर सवाल?

 

‘द गार्डियन’ की रिपोर्ट के मुताबिक, तिब्बत की तरफ ग्यिरोंग बॉर्डर क्रॉसिंग के आस-पास के गांवों में हजारों लोग रहते हैं, फिर भी चीन में आधिकारिक तौर पर सिर्फ 7 लोगों की मौत की जानकारी दी गई.

 

नेपाल में पत्रकार आपदा प्रभावित इलाके में बचे हुए लोगों, बचाव कर्मियों और स्थानीय निवासियों से बात करने के लिए पहुंचे. उनकी रिपोर्ट्स में विस्तार से बताया गया कि कैसे बाढ़ ने घरों को तहस-नहस कर दिया और लोगों व संपत्ति को बहा ले गई. हालांकि, वैज्ञानिक अभी भी बाढ़ के असली कारण का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं. बॉर्डर के दूसरी तरफ तिब्बत में स्थिति कुछ साफ नजर नहीं आ रही है.

 

चीन की बाढ़ कवरेज भी सवालिया निशाने पर

 

चीन के सरकारी मीडिया ने बाढ़ पर कई रिपोर्ट्स पब्लिश की हैं और प्रभावित इलाकों में पत्रकारों को भेजा है. हालांकि, ज्यादातर कवरेज तबाही के पैमाने के बजाय बचाव और राहत कार्यों पर केंद्रित रही है.

 

तिब्बत में एक राहत केंद्र से प्रसारण के दौरान, चीनी पत्रकार ने अपने पीछे बैठे किसी भी शख्स से बात नहीं की. इस सीमित पहुंच की वजह से फ्रीलांसर और अंतरराष्ट्रीय मीडिया के लिए ये पता लगाना मुश्किल हो गया है कि जमीनी स्तर पर क्या हो रहा है.

 

तिब्बत की कवरेज रिपोर्ट गोपनीय क्यों? 

 

तिब्बत चीन के सबसे संवेदनशील और कड़े नियंत्रण वाले इलाकों में से एक है. इस इलाके में विरोध-प्रदर्शन हुए हैं, जिनमें ज्यादा फ्रीडम और धार्मिक आजादी की मांग करने वाले तिब्बतियों द्वारा आत्मदाह की घटनाएं भी शामिल हैं. चीनी अधिकारियों ने इन विरोध-प्रदर्शनों को सख्ती से दबाया है.

आम तौर पर अंतरराष्ट्रीय पत्रकारों को तिब्बत से स्वतंत्र रूप से रिपोर्टिंग करने की इजाजत नहीं होती है. वे वहां सिर्फ उन दौर के हिस्से के तौर पर जा सकते हैं जिन्हें आलोचक सरकार द्वारा आयोजित और कड़े नियंत्रण वाले दौरे बताते हैं.

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