डेस्क: भारत में घूमने के लिए एक से बढ़कर एक पर्यटन स्थल (Tourist Attractions) हैं, लेकिन कुछ जगहें ऐसी भी हैं जहां आम पर्यटक अपनी मर्जी से प्रवेश नहीं (Tourists cannot enter at their own discretion.) कर सकते। कहीं राष्ट्रीय सुरक्षा (National Security) का सवाल है तो कहीं दुर्लभ आदिवासी समुदायों और पर्यावरण की सुरक्षा के कारण आवाजाही सीमित है। कुछ स्थानों पर विशेष अनुमति के बाद ही पहुंच संभव है, जबकि कुछ इलाकों में आम लोगों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित है।
आइए जानते हैं देश की ऐसी ही सात जगहों के बारे में, जहां घूमने के लिए सामान्य पर्यटन स्थलों जैसी आजादी नहीं है।
1. बैरन आइलैंड, अंडमान और निकोबार
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का बैरन आइलैंड भारत के एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी के लिए जाना जाता है। यहां पर्यटक नाव से ज्वालामुखी और द्वीप का नजारा देख सकते हैं, लेकिन आम तौर पर द्वीप पर उतरने की अनुमति नहीं है।
गृह मंत्रालय ने भी बैरन आइलैंड को प्रतिबंधित पर्यटन स्थलों की सूची में रखा है। इसलिए यहां घूमने का अनुभव समुद्र से ज्वालामुखी को देखने तक सीमित रहता है।
2. भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र, मुंबई
मुंबई के ट्रॉम्बे में स्थित भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) देश की प्रमुख परमाणु अनुसंधान संस्थाओं में शामिल है। यह सामान्य पर्यटन स्थल नहीं है और यहां सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी है।
केंद्र के आधिकारिक दस्तावेजों में परिसर में प्रवेश के लिए अधिकृत कर्मियों और कर्मचारियों के लिए पास तथा अनुमति संबंधी प्रक्रियाओं का उल्लेख है। ऐसे में कोई आम पर्यटक बिना अनुमति परिसर में प्रवेश कर यहां घूम नहीं सकता।
3. नॉर्थ सेंटिनल आइलैंड, अंडमान और निकोबार
नॉर्थ सेंटिनल आइलैंड दुनिया के सबसे अलग-थलग रहने वाले स्वदेशी समुदायों में से एक, सेंटिनलीज जनजाति, का घर है। इस समुदाय की सुरक्षा और बाहरी संपर्क से होने वाले संभावित नुकसान को देखते हुए द्वीप और उसके आसपास के क्षेत्र को जनजातीय आरक्षित क्षेत्र घोषित किया गया है।
द्वीप के साथ उच्च ज्वार रेखा से पांच किलोमीटर तक का समुद्री क्षेत्र भी आरक्षित क्षेत्र में शामिल है। गैर-आदिवासियों का यहां प्रवेश प्रतिबंधित है। इसका एक बड़ा कारण बाहरी बीमारियों से समुदाय की रक्षा करना भी है, क्योंकि लंबे समय तक अलग-थलग रहने के कारण उनमें कई बीमारियों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता बेहद कम हो सकती है।
4. सियाचिन ग्लेशियर, लद्दाख
सियाचिन को दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्रों में गिना जाता है। सामरिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील होने के कारण यहां आम लोगों की आवाजाही सामान्य पर्यटन स्थलों जैसी नहीं है।
हालांकि पूरे सियाचिन ग्लेशियर को नागरिकों के लिए पूरी तरह बंद मानना सही नहीं होगा। 2021 में सियाचिन बेस कैंप को घरेलू पर्यटकों के लिए खोला गया था। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि पर्यटक सैन्य क्षेत्र में स्वतंत्र रूप से कहीं भी जा सकते हैं। संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों में प्रवेश और आवाजाही सुरक्षा नियमों तथा प्रशासनिक अनुमति के अधीन रहती है।
5. निकोबार के जनजातीय आरक्षित क्षेत्र
निकोबार द्वीप समूह के कई हिस्से स्वदेशी समुदायों और संवेदनशील पर्यावरणीय क्षेत्रों के कारण विशेष सुरक्षा के दायरे में हैं। यहां सामान्य पर्यटक की तरह घूमना संभव नहीं है।
निकोबार की यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए संबंधित सरकारी अनुमति या जनजातीय पास की आवश्यकता होती है। विदेशी नागरिकों के लिए भी निकोबार द्वीप समूह की यात्रा पर विशेष प्रतिबंध हैं। इन नियमों का उद्देश्य शोम्पेन समेत संवेदनशील आदिवासी समुदायों को बाहरी हस्तक्षेप से सुरक्षित रखना है।
6. इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र, कलपक्कम
तमिलनाडु के कलपक्कम में स्थित इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र (IGCAR) परमाणु ऊर्जा विभाग के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक एवं अनुसंधान संस्थान है।
परमाणु अनुसंधान से जुड़े इस परिसर में सुरक्षा और प्रवेश के लिए निर्धारित प्रक्रियाएं लागू हैं। इसलिए यह आम जनता के लिए खुले पर्यटन स्थल की श्रेणी में नहीं आता। परिसर में प्रवेश के लिए अधिकृत अनुमति जरूरी होती है।
7. नंदा देवी आंतरिक अभयारण्य, उत्तराखंड
उत्तराखंड का नंदा देवी क्षेत्र अपनी प्राकृतिक खूबसूरती और संवेदनशील हिमालयी पारिस्थितिकी के लिए प्रसिद्ध है। यह क्षेत्र यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल का हिस्सा है।
नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान के कुछ हिस्सों में निर्धारित मार्गों से पहुंच संभव है, लेकिन आंतरिक अभयारण्य में आम पर्यटकों को स्वतंत्र रूप से घूमने की अनुमति नहीं है। संवेदनशील पर्यावरण को नुकसान से बचाने के लिए यहां मानव गतिविधियों और पर्यटकों की आवाजाही पर कड़े नियम लागू हैं। कुछ क्षेत्रों में प्रवेश के लिए निर्धारित परमिट की आवश्यकता होती है।
सुरक्षा से लेकर पर्यावरण तक, अलग-अलग हैं वजहें
भारत की इन जगहों पर प्रतिबंध लगाने के पीछे कारण अलग-अलग हैं। परमाणु अनुसंधान केंद्रों में राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुख वजह है, जबकि नॉर्थ सेंटिनल और निकोबार के कुछ इलाकों में आदिवासी समुदायों की सुरक्षा प्राथमिकता है। वहीं नंदा देवी जैसे क्षेत्रों में नाजुक हिमालयी पर्यावरण की रक्षा महत्वपूर्ण है।
इसलिए इन स्थानों को लेकर पर्यटकों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि किसी भी प्रतिबंधित या संवेदनशील क्षेत्र में बिना अनुमति प्रवेश करने की कोशिश न करें और संबंधित प्रशासन के मौजूदा नियमों का पालन करें।

