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जब शूटिंग के दौरान सच में पिटने लगे थे अक्षय कुमार, चौकीदार का हमला भी कैमरे में कैद; फिल्म में दिखा दिया पूरा सीन

डेस्क: बॉलीवुड में फिल्मों की शूटिंग (film shoots)आज बेहद योजनाबद्ध (organized manner)तरीके से होती है। बड़े बजट की फिल्मों में हर सीन की तैयारी पहले से की जाती है और कलाकारों की सुरक्षा से लेकर लोकेशन की अनुमति तक हर चीज का खास ध्यान रखा जाता है। लेकिन 90 के दशक में फिल्मों की शूटिंग का अंदाज काफी अलग हुआ करता था। कई बार सीमित संसाधनों के बीच ऐसे सीन शूट कर लिए जाते थे जिनकी कल्पना आज के दौर में करना भी मुश्किल लगता है। अभिनेता अक्षय कुमार ने खुद एक इंटरव्यू में अपने शुरुआती दौर की शूटिंग से जुड़ा ऐसा ही मजेदार और हैरान करने वाला किस्सा साझा किया था।
यह किस्सा साल 1997 में रिलीज हुई फिल्म अफलातून की शूटिंग से जुड़ा है। अक्षय कुमार ने बताया था कि उस दौर में शूटिंग के दौरान कई बार टीम बिना ज्यादा औपचारिकता के लोकेशन तलाश लेती थी और वहीं कैमरा लगाकर काम शुरू कर देती थी। फिल्म के टाइटल ट्रैक की शूटिंग के दौरान भी कुछ ऐसा ही हुआ। गाने में दिखाई गई एक कार शूटिंग के लिए खास तौर पर मंगाई गई कोई फिल्मी गाड़ी नहीं थी बल्कि वह वहां से गुजर रही थी।
अक्षय कुमार के मुताबिक जब उन्हें पता चला कि कार का मालिक उनका फैन है तो उन्होंने उससे मजाकिया अंदाज में पूछा कि क्या वह कुछ मिनट के लिए उसकी गाड़ी पर डांस कर सकते हैं। फैन ने खुशी से इसकी अनुमति दे दी। इसके बाद अक्षय कुमार और फिल्म की टीम ने उसी कार को शूटिंग का हिस्सा बना लिया। गाड़ी के ऊपर डांस करने के साथ उसके आसपास कई दूसरे शॉट भी रिकॉर्ड किए गए। उस समय फिल्म निर्माण में मौजूद यह जुगाड़ वाला अंदाज आज की हाईटेक शूटिंग से बिल्कुल अलग नजर आता है।
लेकिन इस शूटिंग का सबसे दिलचस्प हिस्सा तब सामने आया जब अक्षय कुमार ने बताया कि कई जगहों पर टीम बिना अनुमति के बिल्डिंग के अंदर जाकर शूटिंग कर लिया करती थी। ऐसी ही एक जगह पर शूटिंग करते समय चौकीदार ने टीम को देख लिया। चौकीदार को जब पता चला कि बिना अनुमति वहां शूटिंग की जा रही है तो वह उन्हें रोकने के लिए दौड़ पड़ा। मामला सिर्फ रोकने तक सीमित नहीं रहा बल्कि अक्षय कुमार ने बताया कि वे पिटते-पिटते बच गए।
सबसे खास बात यह रही कि चौकीदार के पीछे भागने और उन्हें मारने की कोशिश का पूरा घटनाक्रम कैमरे में रिकॉर्ड हो गया। अक्षय कुमार के मुताबिक चौकीदार ने उन्हें मारा भी था और टीम ने उस वास्तविक घटना को बेकार जाने देने के बजाय शूट किए गए विजुअल का हिस्सा बना दिया। यानी फिल्म में दिखाई देने वाला वह सीन किसी स्टंट या पहले से तय किए गए एक्शन का हिस्सा नहीं बल्कि शूटिंग के दौरान घटा वास्तविक घटनाक्रम था।
अक्षय कुमार ने इस पूरे किस्से को याद करते हुए बताया था कि उस दौर में इस तरह की घटनाओं के बावजूद शूटिंग करने में काफी मजा आता था। आज जहां किसी फिल्म के एक छोटे से सीन के लिए भी लोकेशन परमिशन सुरक्षा टीम और कई स्तर की तैयारी की जाती है वहीं 90 के दशक में कई बार मौके की परिस्थितियों को ही शूटिंग का हिस्सा बना लिया जाता था।

फिल्म अफलातून में अक्षय कुमार ने डबल रोल निभाया था। कहानी एक छोटे मोटे चोर के इर्द गिर्द घूमती है जिसकी जिंदगी एक लड़की से प्यार के बाद बदलती है। कहानी में उसका हमशक्ल सामने आता है जो एक किलर होता है और इसके बाद घटनाएं तेजी से बदलती हैं। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता हासिल नहीं कर सकी लेकिन इसके गाने और कुछ सीन दर्शकों के बीच चर्चा में रहे। अक्षय कुमार से जुड़ा शूटिंग का यह किस्सा आज भी उनके शुरुआती फिल्मी दौर की अलग और बेफिक्र कार्यशैली की याद दिलाता है।

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