डेस्क: नेपाल के रसुवा जिले में बुधवार को अचानक आई भीषण बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी। भारी बारिश के बाद भोटेकोशी नदी और आसपास के जलस्रोतों में अचानक पानी बढ़ने से टिमुरे और स्याफ्रुबेसी इलाके प्रभावित हुए।

बाढ़ का पानी इतनी तेजी से बढ़ा कि बाजारों, सड़कों और हाइड्रोपावर परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचा। स्थानीय लोगों ने पानी के तेज बहाव की तुलना बांध टूटने जैसी स्थिति से की।
कई हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स को नुकसान
बाढ़ की चपेट में हाइड्रोपावर सेक्टर भी आया है। रिपोर्टों के मुताबिक, एक हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट बाढ़ के तेज बहाव में बह गया, जबकि चिलिमे समेत अन्य परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचा है। इससे इलाके में बिजली उत्पादन और परियोजनाओं के बुनियादी ढांचे पर असर पड़ने की आशंका है।
नेपाल के अन्य पहाड़ी इलाकों में भी हाल के दिनों में बाढ़ और भूस्खलन ने हाइड्रोपावर परियोजनाओं को प्रभावित किया है। कास्की में बाढ़ के कारण निर्माणाधीन अपर मोदी और अपर मादी परियोजनाओं के ढांचे तथा निर्माण सामग्री को नुकसान पहुंचने की खबरें सामने आई हैं।
सड़कें और वाहन भी पानी में बहे
अचानक आए सैलाब ने परिवहन व्यवस्था को भी प्रभावित किया। रसुवा में कई वाहन बाढ़ की चपेट में आने की खबर है, जबकि बाजार और सीमा क्षेत्र का बुनियादी ढांचा भी क्षतिग्रस्त हुआ है। इससे स्थानीय आवाजाही और व्यापारिक गतिविधियों पर असर पड़ा है।
इससे पहले भी भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ ने रसुवागढ़ी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाया था। रिपोर्ट के अनुसार, कई कंटेनर, ट्रक और इलेक्ट्रिक वाहन पानी के तेज बहाव में बह गए थे तथा कई हाइड्रोपावर परियोजनाएं प्रभावित हुई थीं।
निचले इलाकों के लिए भी अलर्ट
बाढ़ के पानी को देखते हुए नेपाल के अधिकारियों ने त्रिशूली नदी के आसपास के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। धादिंग प्रशासन ने नुवाकोट और धादिंग के डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों में संभावित खतरे को देखते हुए अलर्ट जारी किया है और सुरक्षा बलों को तैनात किया गया है।
फिलहाल प्रशासन और संबंधित एजेंसियां राहत एवं बचाव कार्यों में जुटी हैं। बाढ़ की सही वजह और कुल नुकसान का आकलन किया जा रहा है। शुरुआती रिपोर्टों में भारी बारिश को प्रमुख कारण बताया गया है, जबकि प्रभावित क्षेत्रों में पानी के अचानक बढ़ने की परिस्थितियों की भी जांच की जा रही है।
नेपाल में लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने पहाड़ी क्षेत्रों में बाढ़, भूस्खलन और हाइड्रोपावर परियोजनाओं की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता प्रभावित लोगों की सुरक्षा, संपर्क मार्ग बहाल करना और संभावित रूप से प्रभावित निचले इलाकों को समय रहते अलर्ट करना है।

