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MP: इंदौर में मूर्ति निर्माण में POP और रासायनिक रंगों के इस्तेमाल पर बैन, नई गाइडलाइन जारी

डेस्क: इंदौर जिले (Indore district) में पर्यावरण संरक्षण, जल निकायों को प्रदूषण से बचाने के लिए प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी शिवम वर्मा (Shivam Verma) ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163 के तहत इंदौर में प्रतिबंधात्मक आदेश लागू कर दिए हैं। यह आदेश 19 अगस्त 2026 से तुरंत लागू होकर 18 अक्टूबर 2026 तक प्रभावी रहेगा।

प्रतिबंध के मुख्य नियम और निर्देश
जारी किए गए आदेश के अनुसार, जिले में प्रतिमाओं और मूर्तियों के निर्माण के लिए केवल प्राकृतिक और परंपरागत मिट्टी का ही उपयोग किया जाएगा। किसी भी परिस्थिति में पकी हुई मिट्टी, पीओपी (प्लास्टर ऑफ पेरिस), रासायनिक पदार्थों या केमिकल्स के इस्तेमाल पर पूरी तरह से रोक (Ban POP Idols Chemical Dyes) लगा दी गई है। इसके साथ ही मूर्तियों पर रंग-रोगन करने के लिए केवल प्राकृतिक और गैर-विषाक्त रंगों के उपयोग की ही अनुमति दी गई है। किसी भी तरह के जहरीले और केमिकल रंगों का प्रयोग पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगा।

उत्पादन, खरीद-बिक्री और परिवहन पर रोक
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इंदौर जिले की सीमा में केवल परंपरागत मिट्टी से बनी मूर्तियों के निर्माण और बिक्री की अनुमति होगी। पीओपी या किसी भी रासायनिक पदार्थ से बनाई गई मूर्तियों का उत्पादन, बिक्री, जिले से बाहर भेजना या बाहर के क्षेत्रों से जिले के भीतर लाना पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया है।

स्थानीय निकायों की जिम्मेदारी और कार्रवाई
नगर निगम और अन्य स्थानीय निकायों को निर्देश दिए गए हैं कि वे मूर्ति निर्माण स्थलों का आवश्यक सत्यापन करें। आदेश लागू होने के बाद यदि कोई व्यक्ति मिट्टी के स्थान पर पीओपी या रासायनिक पदार्थों का उपयोग करते हुए पाया जाता है, तो संबंधित नगर निगम या स्थानीय निकाय ऐसी मूर्तियों को तुरंत अपने कब्जे में ले लेगा। इन जब्त की गई मूर्तियों का निपटान नगरीय ठोस अपशिष्ट नियम-2000 के तहत तय प्रावधानों के अनुसार किया जाएगा।
विसर्जन प्रक्रिया और पर्यावरण सुरक्षा
मूर्ति विसर्जन से पहले पूजा सामग्री जैसे फल, फूल, नारियल, वस्त्र, आभूषण और सजावट की वस्तुएं, जिनमें प्लास्टिक और कागज से बनी वस्तुएं शामिल हैं, उन्हें प्रतिमा से अलग करके एकत्र किया जाएगा। इस सामग्री का निस्तारण भी नगरीय ठोस अपशिष्ट नियम-2000 के अनुसार किया जाएगा।
इसके अलावा, मूर्ति विसर्जन के 24 घंटे के अंदर जल स्रोतों से निकला ठोस अपशिष्ट, जैसे बांस, रस्सी, मिट्टी, पीओपी और प्रतिमाओं के अन्य अवशेषों को एकत्र करके नियमानुसार निपटान किया जाएगा।
उल्लंघन पर कानूनी कार्रवाई
कलेक्टर द्वारा जारी आदेश में राष्ट्रीय हरित अधिकरण, सेन्ट्रल जोनल बेंच, भोपाल और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं। इस प्रतिबंधात्मक आदेश का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 223 के तहत दण्डनीय आपराधिक कार्रवाई की जाएगी।

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