डेस्क : सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट के फैसले पर लगाई मुहर, संविदा कर्मियों को रेगुलराइजेशन का रास्ता खुला।
बिहार में कई वर्षों से लंबित लैब टेक्नीशियन नियुक्ति एवं नियमितीकरण* मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट से अभ्यर्थियों और संविदा कर्मियों को बड़ी राहत मिली है।
माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने LPA No. 296/2021, सुरजीत कुमार बनाम बिहार सरकार* मामले की सुनवाई करते हुए पटना उच्च न्यायालय की डबल बेंच के आदेश को सही ठहराते हुए *2014 के नियमों को वैध* करार दिया है।
कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि वर्ष *2019 के याचिकाकर्ता अभ्यर्थी/कर्मचारी* तथा जो लोग *पिछले 10 से 15 वर्षों से संविदा पर कार्यरत* हैं, वे बिहार सरकार के समक्ष *Regularization अर्थात नियमितीकरण* की मांग रख सकते हैं। साथ ही कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि ऐसे कर्मचारियों के मामले पर विचार कर स्थिति स्पष्ट की जाए।
इस फैसले को Lab Technician संघ ने अपनी *ऐतिहासिक जीत* बताया है। संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि यह निर्णय हजारों संविदा कर्मियों के भविष्य के लिए मील का पत्थर साबित होगा।

इस लंबे कानूनी संघर्ष में याचिकाकर्ताओं की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पैरवी *वरिष्ठ अधिवक्ता सदान फराशत* एवं *सम्मान वर्धन गौतम* ने की। संघ ने दोनों अधिवक्ताओं और आंदोलन में शामिल सभी साथियों के प्रति आभार व्यक्त किया है।
संघ ने कहा कि “यह जीत किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि सभी साथियों की एकता, धैर्य और निरंतर संघर्ष का परिणाम है।”

