राष्ट्रीय

बृजभूषण केस में कोर्ट का बड़ा फैसला: ‘आरोप गढ़े हुए लगते हैं’, दो पहलवानों ने कहा- दबाव में दर्ज कराई थी शिकायत

डेस्क: पूर्व भाजपा सांसद और भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह (Brij Bhushan Sharan Singh) को महिला पहलवानों के यौन उत्पीड़न मामले में अदालत ने बरी कर दिया है। अदालत ने अपने 239 पन्नों के फैसले में अभियोजन पक्ष के मामले पर गंभीर सवाल उठाए और कहा कि आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त और विश्वसनीय साक्ष्य पेश नहीं किए जा सके।
अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अश्विनी पंवार ने 3 अगस्त को दिए फैसले में बृजभूषण शरण सिंह के साथ WFI के पूर्व सहायक सचिव विनोद तोमर को भी बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि पांच शिकायतकर्ता पहलवानों में से दो ने अदालत में अपने बयानों के दौरान यौन उत्पीड़न के आरोपों से इनकार किया और कहा कि उन्हें इस तरह के आरोप लगाने के लिए दबाव में रखा गया था।

कोर्ट ने बयानों में गिनाईं कई विसंगतियां
अदालत ने शिकायतकर्ता पहलवानों के बयानों में कई महत्वपूर्ण विरोधाभासों का उल्लेख किया। फैसले के मुताबिक, कथित पहली घटना के बारे में शिकायतकर्ताओं ने स्थान और वर्ष तक अलग-अलग बताए।
कोर्ट ने टिप्पणी की कि कथित यौन उत्पीड़न की घटना कहां हुई, इसे याद न रख पाना असामान्य है, खासकर तब जब घटना किसी सार्वजनिक स्थान पर होने का आरोप लगाया गया हो। अदालत ने इन विसंगतियों को अभियोजन के मामले के लिए गंभीर माना।
‘करियर खराब होने के डर’ वाली दलील पर भी सवाल
अदालत के सामने शिकायतकर्ताओं की ओर से यह तर्क रखा गया था कि करियर प्रभावित होने के डर से उन्होंने तत्काल शिकायत नहीं की। हालांकि, अदालत ने इस पहलू पर भी सवाल उठाए।
फैसले में कहा गया कि यदि आरोप इतने गंभीर थे तो इसके बावजूद लंबे समय तक बृजभूषण सिंह के साथ शिकायतकर्ताओं के सौहार्दपूर्ण संबंध बने रहना समझना मुश्किल है। अदालत ने रिकॉर्ड में मौजूद कुछ तस्वीरों का भी उल्लेख किया, जिनमें शिकायतकर्ता कथित तौर पर सिंह को पारिवारिक कार्यक्रमों और शादियों में आमंत्रित करती दिखाई देती हैं।
कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि यदि घटनाएं वास्तव में हुई थीं तो शिकायतकर्ताओं या अन्य गवाहों ने उस समय औपचारिक शिकायत क्यों नहीं की और संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी जानकारी क्यों नहीं दी।

‘धरने से पहले यौन उत्पीड़न की शिकायत नहीं’
अदालत ने 21 अप्रैल 2023 को पुलिस के समक्ष दाखिल की गई शिकायतों की प्रकृति पर भी टिप्पणी की। फैसले में इन्हें तैयारशुदा और एक खास तरीके से प्रस्तुत किया गया बताया गया।
कोर्ट के मुताबिक, पहलवानों के धरने से पहले बृजभूषण के खिलाफ यौन उत्पीड़न का कोई आरोप सामने नहीं आया था। इसके बाद कुछ पहलवानों की ओर से समान प्रकृति के आरोप लगाए गए।
दो शिकायतकर्ताओं ने आरोपों से किया इनकार
फैसले में अदालत ने विशेष रूप से दो शिकायतकर्ताओं के बयानों का उल्लेख किया। दोनों ने अदालत में कहा कि उनके साथ यौन उत्पीड़न नहीं हुआ था और उन्हें आरोप लगाने या बयान देने के लिए दबाव डाला गया।
अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में भी असफल रहा कि इन दोनों शिकायतकर्ताओं ने आरोपी की ओर से किसी दबाव के कारण अपने पहले के आरोपों से पीछे हटने की बात कही थी।
‘मामला राजनीतिक रूप से प्रेरित प्रतीत होता है’
अदालत ने उपलब्ध रिकॉर्ड और गवाहों के बयानों का मूल्यांकन करने के बाद कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में पूरी तरह विफल रहा।
फैसले में यह भी कहा गया कि पूरा घटनाक्रम दो अन्य शिकायतकर्ता पहलवानों और महादेव अकादमी से जुड़े कोचों की कथित भूमिका वाली साजिश का नतीजा प्रतीत होता है। अदालत ने मामले को राजनीतिक रूप से प्रेरित और आरोपों को झूठा व गढ़ा हुआ प्रतीत होने की बात भी कही।
इसी आधार पर अदालत ने बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर को मामले में बरी कर दिया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *