डेस्क: काउंटर इंटेलिजेंस एजेंसी कश्मीर (सीआईके) (Counter Intelligence Agency Kashmir -CIK) ने विदेशी टेरर फंडिंग (Foreign Terror Funding) का बड़ा भंडाफोड़ किया है। दुबई, पाकिस्तान के कब्जे वाले गुलाम कश्मीर और यूनाइटेड किंगडम में मौजूद आरोपी मोहम्मद इकबाल नैमा उर्फ अनीस, मुख्तार अहमद बाबा और शमीमा शॉल टेरर फंडिंग की अहम कड़ी के रूप में सामने आई हैं। तीनों आरोपियों पर जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) में आतंकियों, अलगववादियों और आतंकियों के मददगार यानी ओजीडब्ल्यू की फंडिंग के लिए मक्का में 13,600 सऊदी रियाल जमा करने का आरोप है। एजेंसी के सूत्रों के अनुसार यह रकम 10 लाख रियाल तक भी पहुंच सकती है, जो भारतीय मुद्रा में करीब 2.53 करोड़ रुपये होगी।
प्रतिबंधित दे रेजिस्टेंस फ्रंट से जुड़ा है मुख्तार अहमद बाबा
मामले में सीआईके की विशेष अदालत ने मंगलवार को तीनों आरोपियों की गिरफ्तारी का आदेश जारी किया है। सभी के विरुद्ध टाडा/पोटा और एनआईए एक्ट के तहत नियुक्त श्रीनगर के एडिशनल सेशन जज और स्पेशल जज मंजीत राय ने वारंट जारी किया है। सीआईके से मिली जानकारी के हवाले से दावा किया गया है कि मुख्तार अहमद बाबा प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) से जुड़ा है। वह पाकिस्तान से अपनी गतिविधियां चला रहा है। जांच में सीआईके को पता चला है कि श्रीनगर के एक ही परिवार के इरफान गुल, शाजिया नजीर और रियाज अहमद गोजरी ने बीते साल जनवरी में उमरा के बहाने सऊदी अरब की यात्रा की थी। एजेंसी का दावा है कि सऊदी अरब में रहने के दौरान तीनों ने मुख्तार अहमद बाबा के सहयोगियों से संपर्क किया और आतंकियों, अलगाववादियों को बांटने के लिए पैसे लिए।
दुबई की शिपिंग कंपनी में काम कर रहा नैमा
मूल रूप से बटमालू निवासी नैमा दुबई की एक शिपिंग कंपनी में ऑपरेशनल मैनेजर के तौर पर काम कर रहा है। जांच रिपोर्ट के अनुसार मोहम्मद इकबाल नैमा उर्फ अनीस ने शमीमा शॉल का मोबाइल नंबर रियाज अहमद गोजरी के साथ साझा किया। इसके बाद गोजरी ने शॉल से संपर्क किया और मक्का में हवाला के माध्यम से उससे 13,600 सऊदी रियाल लिए। इस रकम में से 1,500 सऊदी रियाल इरफान गुल को दिए गए। एजेंसी के अनुसार इस लेन-देन का मकसद भारत में आतंकी और देश विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा देना था।
लश्कर-ए-ताइबा के ट्रेनिंग कैंपों में सक्रिय रहा बाबा मुख्तार अहमद
एजेंसी के अनुसार बाबा ने 2018 में तुर्की की यात्रा की और बाद में पाकिस्तान चला गया। वह मुरिदके में लश्कर-ए-ताइबा के ट्रेनिंग कैंपों में सक्रिय रहा। कोर्ट को बताया गया कि जुलाई, 2021 में जम्मू-कश्मीर सीआईडी ने बाबा के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी किया। इसके अलावा बीते साल सितंबर में श्रीनगर के चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट ने एक दूसरे मामले में उसके खिलाफ गिरफ्तारी का सामान्य वारंट भी जारी किया।
आल पार्टीज हुर्रियत कांफ्रेंस की प्रतिनिधि है शमीमा
जांच एजेंसी के अनुसार मूल रूप से बारामूला निवासी शमीमा शॉल 1992 में पाकिस्तान चली गई थी और बाद में यूनाइटेड किंगडम में बस गई। एजेंसी ने उसे एक प्रमुख अलगाववादी नेता और आल पार्टीज हुर्रियत कॉन्फ्रेंस का प्रतिनिधि बताया। दावा किया कि वह भारत की मुखालफत में शामिल थी। सीआईके के अनुसार तीनों आरोपियों को पेश होने के लिए संबंधित अधिकारियों और उनके रिश्तेदारों के जरिये नोटिस भेजे गए। लेकिन वे पेश नहीं हुए।
इन धाराओं में दर्ज है मामला
आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 61(2) एवं गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) की धाराओं 13, 38, 39 और 40 के तहत मामला दर्ज है। बीएनएस की धारा 61(2) आपराधिक षड्यंत्र के लिए सजा का प्रावधान करती है। वहीं, यूएपीए की धारा 13 गैरकानूनी गतिविधियों के लिए सजा, 38 आतंकी संगठन की सदस्यता से संबंधित अपराध, 39 आतंकी संगठन को समर्थन देने से संबंधित अपराध और 40 आतंकी संगठन के लिए धन जुटाने, देश की सुरक्षा और शांति के खिलाफ काम करने वालों पर लगाई जाती है।

