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प्रयागराज में फिरोज गांधी की कब्रगाह पर बढ़ी राजनीतिक हलचल, भाजपा ने शुरू की सक्रियता; कांग्रेस की अनुपस्थिति पर उठे सवाल

डेस्क: वर्षों से उपेक्षा का सामना कर रही पूर्व सांसद फिरोज जहांगीर गांधी (Feroze Jehangir Ghandy) की कब्रगाह अब राजनीतिक चर्चा का केंद्र बनती नजर आ रही है। मम्फोर्डगंज स्थित इस कब्रगाह पर लंबे समय से बड़े राजनीतिक नेताओं की मौजूदगी नहीं रही, लेकिन हाल के दिनों में भाजपा की सक्रियता के बाद यह स्थान फिर सुर्खियों में आ गया है।
बताया जा रहा है कि पिछले महीने भाजपा ओबीसी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष प्रकाश पाल ने कब्रगाह पहुंचकर फिरोज गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद भाजपा ने इस मुद्दे को राजनीतिक रूप से भी उठाना शुरू कर दिया है।

कब्रगाह की देखरेख पर सरकार की नजर
सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को कब्रगाह परिसर की सफाई और व्यवस्था पर ध्यान देने के निर्देश दिए हैं। कब्रगाह का प्रबंधन पारसी समुदाय के पास है, जबकि रखरखाव को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं।

केयरटेकर ने क्या बताया?
कब्रगाह के केयरटेकर अनिल के मुताबिक, वर्षों पहले सोनिया गांधी और बाद में राहुल गांधी यहां आए थे, लेकिन उसके बाद से परिवार का कोई सदस्य यहां नहीं पहुंचा। उन्होंने बताया कि हर वर्ष 8 सितंबर, फिरोज गांधी की पुण्यतिथि पर भी श्रद्धांजलि देने वालों की संख्या बेहद कम रहती है।
अनिल के अनुसार, हाल ही में भाजपा नेता प्रकाश पाल ने यहां पहुंचकर पुष्पांजलि अर्पित की थी।

भाजपा का कांग्रेस पर निशाना
भाजपा नेता प्रकाश पाल ने कहा कि जिस व्यक्ति को कांग्रेस ने भुला दिया है, उसे भाजपा सम्मान देने का काम करेगी। उनका कहना है कि फिरोज गांधी भारतीय  राजनीति के महत्वपूर्ण व्यक्तित्व रहे हैं और उनकी स्मृतियों का संरक्षण होना चाहिए।
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि भाजपा पहले भी इस मुद्दे को उठा चुकी है। कुंभ मेले के दौरान भी भाजपा के एक मंत्री ने कब्रगाह पहुंचकर श्रद्धांजलि दी थी। अब राहुल गांधी के प्रयागराज दौरे की संभावनाओं के बीच भाजपा कांग्रेस की कथित अनदेखी को राजनीतिक मुद्दा बना सकती है।
जर्जर हालत में ऐतिहासिक स्थल
कब्र पर अंग्रेजी में लिखा संदेश—”He Is Not Dead…”—आज भी धुंधले और टूटे हुए अक्षरों में देखा जा सकता है। हालांकि, कब्र के चारों ओर बना घेरा जर्जर हो चुका है। परिसर में झाड़ियां उग आई हैं और वहां लगा प्रकाश स्तंभ भी लंबे समय से बंद पड़ा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस ऐतिहासिक स्थल के संरक्षण पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। हाल ही में पारसी समुदाय के एक सदस्य ने भी कब्रगाह का निरीक्षण कर उसकी बदहाल स्थिति पर चिंता जताई और प्रबंधन से रखरखाव बेहतर करने की बात कही।

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