डेस्क:आगरा । आगरा की शाही जामा मस्जिद कमेटी के अध्यक्ष मोहम्मद जाहिद ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि एएसआई के कुछ कर्मचारी संरक्षित स्मारकों के आसपास अवैध निर्माण को रोकने के बजाय कथित रूप से पैसे लेकर उसे बढ़ावा देते हैं। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले को लेकर वह जल्द ही जनहित याचिका (पीआईएल) दायर करेंगे और जरूरत पड़ने पर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाएंगे। मोहम्मद जाहिद ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि देशभर में एएसआई के संरक्षित स्मारकों के आसपास निर्माण को लेकर सख्त नियम लागू हैं। यदि किसी संरक्षित स्मारक के आसपास निर्माण करना हो तो नक्शा आसानी से पास नहीं होता, क्योंकि इसके लिए निर्धारित दूरी और अन्य कानूनी प्रावधान लागू होते हैं। उन्होंने कहा कि यह नियम अपनी जगह सही हो सकता है, लेकिन इसका पालन समान रूप से नहीं किया जाता। उन्होंने आरोप लगाया कि एएसआई के कुछ कर्मचारी कथित तौर पर पैसे लेकर स्मारकों के आसपास अवैध निर्माण होने देते हैं। उनका कहना है कि यह मामला केवल आगरा की जामा मस्जिद तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के अन्य संरक्षित स्मारकों के आसपास भी ऐसी स्थिति देखने को मिलती है।
मोहम्मद जाहिद ने कहा कि आगरा की शाही जामा मस्जिद के आसपास वर्षों से अतिक्रमण मौजूद है। इस संबंध में कई बार एएसआई से शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। कई बार लिखित शिकायतें देने के बावजूद न तो अतिक्रमण हटाया गया और न ही किसी प्रकार का नोटिस जारी किया गया।
मोहम्मद जाहिद ने यह भी आरोप लगाया कि शाही जामा मस्जिद की एक मीनार करीब 30 वर्षों से क्षतिग्रस्त अवस्था में है, लेकिन उसके संरक्षण और मरम्मत के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने कहा कि इस संबंध में कई बार पत्राचार किया गया है और अब इस मुद्दे को संसद में भी उठाने की तैयारी की जा रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि एएसआई के वरिष्ठ अधिकारियों तक सही जानकारी नहीं पहुंचती, क्योंकि निचले स्तर के कर्मचारी वास्तविक स्थिति की सही रिपोर्ट नहीं भेजते। इसी कारण कई समस्याएं वर्षों तक लंबित रहती हैं।
मोहम्मद जाहिद ने यह भी कहा कि छोटे-छोटे संरक्षित स्थलों के आसपास रहने वाले लोगों को निर्माण की अनुमति देने के नियमों की समीक्षा होनी चाहिए। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि ताजमहल, आगरा किला, सिकंदरा और एतमाद-उद-दौला जैसे राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों के आसपास सख्त संरक्षण व्यवस्था जारी रहनी चाहिए।

